थोक महंगाई 44 महीने के उच्च स्तर पर, खाने-पीने की चीजों के बढ़े दाम

देश में जून महीने में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले 44 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) भी लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई।

Jul 15, 2026 - 13:11
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थोक महंगाई 44 महीने के उच्च स्तर पर, खाने-पीने की चीजों के बढ़े दाम

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। जून महीने में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 9.68 प्रतिशत थी। यह पिछले 44 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही है।

जून में थोक महंगाई में सबसे अधिक योगदान रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं और खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि का रहा। प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई मई के 4.99 प्रतिशत से बढ़कर जून में 7.00 प्रतिशत हो गई। वहीं खाद्य महंगाई 4.49 प्रतिशत से बढ़कर 6.14 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि ईंधन एवं बिजली (फ्यूल एंड पावर) श्रेणी की थोक महंगाई 30.33 प्रतिशत से घटकर 27.41 प्रतिशत रही, जबकि मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की महंगाई लगभग स्थिर बनी रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ऊर्जा बाजार से जुड़े जोखिम बने रहते हैं, तो कच्चे तेल सहित कई अन्य वस्तुओं की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर घरेलू महंगाई पर भी पड़ सकता है।

थोक महंगाई सूचकांक में सबसे अधिक 64.23 प्रतिशत भार मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स का होता है। इसके अलावा प्राइमरी आर्टिकल्स का 22.62 प्रतिशत और फ्यूल एंड पावर का 13.15 प्रतिशत योगदान रहता है। प्राइमरी आर्टिकल्स में खाद्यान्न, फल-सब्जियां, तिलहन, खनिज और कच्चा पेट्रोलियम जैसे उत्पाद शामिल होते हैं।

महंगाई बढ़ने का असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। जब थोक स्तर पर लागत बढ़ती है, तो कंपनियां उत्पादन लागत का अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं। इससे पैकेज्ड फूड, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, धातु उत्पाद, प्लास्टिक, रसायन और अन्य तैयार उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। सरकार करों में राहत या अन्य उपायों के जरिए महंगाई को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकती है, लेकिन इसकी भी सीमाएं होती हैं।

इधर खुदरा महंगाई (CPI) भी लगातार छठे महीने बढ़ी है। जून में यह 4.38 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि मई में 3.93 प्रतिशत और जनवरी में 2.74 प्रतिशत थी। आलू, अदरक और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण खुदरा महंगाई में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत में महंगाई मापने के लिए दो प्रमुख सूचकांक उपयोग किए जाते हैं। थोक महंगाई (WPI) उन कीमतों को दर्शाती है, जिन पर थोक बाजार में व्यापारियों के बीच वस्तुओं की खरीद-बिक्री होती है। वहीं खुदरा महंगाई (CPI) उन कीमतों पर आधारित होती है, जो आम उपभोक्ता बाजार से सामान खरीदते समय चुकाते हैं। दोनों सूचकांक देश की आर्थिक स्थिति और मूल्य स्तर का महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।