इजरायली खुफिया रिपोर्ट में ट्रंप पर कथित हमले की साजिश का दावा, पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका के साथ साझा की गई एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कथित साजिश रच रहा था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस बीच क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने अमेरिका के साथ साझा की गई एक नई खुफिया रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ कथित हत्या की साजिश रच रहा था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियां लंबे समय से ईरान की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। बताया जा रहा है कि साझा की गई इस खुफिया जानकारी के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और नीति-निर्माताओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। साथ ही माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम अमेरिका की ईरान नीति और भविष्य में संभावित परमाणु वार्ताओं को भी प्रभावित कर सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि जनवरी 2020 में और गहरी हो गई थी, जब अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप भी पहले कई सार्वजनिक मंचों पर यह दावा कर चुके हैं कि ईरान उन्हें निशाना बनाना चाहता है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि वे इससे भयभीत नहीं हैं।
इसी बीच पश्चिम एशिया में सुरक्षा हालात भी चिंता का विषय बने हुए हैं। हाल के सप्ताहों में क्षेत्र में हुए संघर्ष और सैन्य गतिविधियों के बाद तनाव फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े कथित ठिकानों पर कार्रवाई के बाद जवाबी हमलों और मिसाइल गतिविधियों की खबरें सामने आई हैं। बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे देशों में सुरक्षा सतर्कता बढ़ाई गई है। बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े का मुख्यालय भी स्थित है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ी हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में आरोप लगाया था कि इस क्षेत्र में जहाजों पर कथित हमले युद्धविराम की स्थिति कमजोर पड़ने का संकेत हैं। हालांकि, इन आरोपों और घटनाओं को लेकर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, इजरायल की ओर से किए गए खुफिया दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी रहेगी।