अल-नीनो को लेकर कृषि विभाग का अलर्ट, किसानों के लिए जारी हुई विशेष एडवाइजरी

दुर्ग जिले में अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष आकस्मिक कार्ययोजना जारी की है। विभाग ने कम पानी में तैयार होने वाली फसलों, फसल विविधीकरण, वर्षा जल संरक्षण और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से जुड़ने की सलाह दी है।

Jul 10, 2026 - 17:23
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अल-नीनो को लेकर कृषि विभाग का अलर्ट, किसानों के लिए जारी हुई विशेष एडवाइजरी

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग। इस वर्ष अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष आकस्मिक कार्ययोजना (कॉन्टिन्जेंसी प्लान) जारी की है। मौसम में अनिश्चितता, मानसून की संभावित देरी, लंबे सूखे और बारिश का मौसम समय से पहले समाप्त होने जैसी आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए किसानों को खेती की रणनीति में बदलाव करने की सलाह दी गई है।

उप संचालक कृषि संदीप भोई ने बताया कि अल-नीनो की स्थिति में जल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली तथा कम अवधि वाली धान की उन्नत किस्मों का चयन करना चाहिए। इससे कम वर्षा की स्थिति में भी फसल उत्पादन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि टिकरा और भर्री जैसी ऊंची भूमि वाले क्षेत्रों में डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) अर्थात कतारबद्ध सीधी बुआई की पद्धति को बढ़ावा दिया जाएगा। यह तकनीक कम पानी में धान उत्पादन के लिए प्रभावी मानी जाती है और श्रम लागत में भी कमी लाती है।

कृषि विभाग ने किसानों को केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह दी है। विभाग का सुझाव है कि किसान धान के साथ अरहर, मूंग, उड़द, तिल, सोयाबीन और मूंगफली जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों की खेती करें। इन फसलों में पानी की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है और प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन की संभावना रहती है। इससे किसानों की आय के स्रोत भी विविध होंगे और जोखिम कम होगा।

मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए विभाग ने मल्चिंग, मेड़बंदी तथा वर्षा जल संरक्षण जैसे उपाय अपनाने की भी सलाह दी है। इन तकनीकों से वर्षा जल का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और सूखे की स्थिति में फसलों को आवश्यक नमी उपलब्ध कराई जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम के दौर में जल संरक्षण आधारित खेती भविष्य की आवश्यकता बन चुकी है।

कलेक्टर अभिजीत सिंह ने कहा कि जिले में किसानों को मौसम की अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए कम पानी में तैयार होने वाली धान की बेहतर किस्मों के साथ-साथ दलहनी और तिलहनी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) में समय पर पंजीयन कराने की अपील की, ताकि प्राकृतिक आपदा या मौसम संबंधी नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की कृषि संबंधी समस्या या तकनीकी मार्गदर्शन की आवश्यकता होने पर वे तत्काल अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारियों से संपर्क करें। विभाग का उद्देश्य मौसम की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देकर किसानों के उत्पादन और आय को सुरक्षित रखना है।