भारत-UAE के बीच बिछेगी 1,600 किमी लंबी अंडरसी पावर केबल, ऊर्जा व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच 1,600 किलोमीटर लंबी अंडरसी HVDC पावर केबल बिछाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दोनों देशों के बीच 2 गीगावाट बिजली का आदान-प्रदान और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देना है।

Jul 10, 2026 - 16:39
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भारत-UAE के बीच बिछेगी 1,600 किमी लंबी अंडरसी पावर केबल, ऊर्जा व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से समुद्र के नीचे लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) पावर केबल बिछाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक के दौरान इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसकी अनुमानित लागत लगभग 40,000 करोड़ रुपये होगी।

यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड" (OSOWOG) विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। इस पहल का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच बिजली ग्रिड को जोड़कर स्वच्छ ऊर्जा के बेहतर उपयोग, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बिजली व्यापार को बढ़ावा देना है।

प्रस्तावित परियोजना के तहत लगभग 1,600 किलोमीटर लंबी अंडरसी केबल बिछाई जाएगी, जो संयुक्त अरब अमीरात के तटीय क्षेत्र को गुजरात के भुज से जोड़ेगी। इस HVDC केबल को समुद्र की लगभग 3,000 से 3,500 मीटर गहराई में स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से लगभग 2 गीगावाट बिजली का ट्रांसमिशन संभव होगा। इस परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को सौंपी गई है और इसे पूरा होने में लगभग पांच से छह वर्ष लग सकते हैं।

ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, भारत केवल UAE के साथ ही नहीं बल्कि क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भी बिजली कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी क्रम में भारत और सऊदी अरब के बीच भी अंडरसी पावर केबल परियोजना पर लगभग 47,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई गई है। इसके अलावा भविष्य में श्रीलंका, सिंगापुर और यूरोप तक भारत के पावर ग्रिड नेटवर्क का विस्तार करने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है।

इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग के रूप में देखा जा रहा है। भारत अपनी घरेलू जरूरत पूरी करने के बाद अतिरिक्त सौर और पवन ऊर्जा को खाड़ी देशों तक पहुंचा सकेगा। वहीं, अलग-अलग टाइम ज़ोन का लाभ उठाते हुए आवश्यकता पड़ने पर भारत भी इन देशों से बिजली प्राप्त कर सकेगा। इससे बिजली आपूर्ति अधिक संतुलित और विश्वसनीय बनने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है, तो यह भारत और UAE के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का नया अध्याय साबित हो सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बिजली व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। यह परियोजना भारत को वैश्विक ऊर्जा कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ाने वाली पहल मानी जा रही है।