रूस से तेल खरीद पर भारत अडिग, मई में 6.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड आयात

मई 2026 में भारत ने रूस से 6.7 अरब डॉलर मूल्य के तेल, कोयला और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात किया। CREA की रिपोर्ट के अनुसार रूस से कच्चे तेल की खरीद में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भारत रूस का दूसरा सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक बना।

Jun 14, 2026 - 12:23
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रूस से तेल खरीद पर भारत अडिग, मई में 6.7 अरब डॉलर का रिकॉर्ड आयात

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली l वैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के बीच भारत ने रूस से ऊर्जा आयात जारी रखते हुए मई 2026 में रिकॉर्ड स्तर पर तेल और अन्य जीवाश्म ईंधन खरीदे। यूरोपीय थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने मई महीने में रूस से लगभग 5.8 अरब यूरो (करीब 6.7 अरब डॉलर) मूल्य के हाइड्रोकार्बन का आयात किया।

रिपोर्ट के मुताबिक रूस से आयातित कुल ऊर्जा उत्पादों में कच्चे तेल की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही। भारत ने मई में लगभग 4.8 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो कुल आयात का करीब 83 प्रतिशत था। इसके अलावा 550 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद और 429 मिलियन यूरो का कोयला भी आयात किया गया।

CREA के आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में महीने-दर-महीने 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें रूस से आयात में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी प्रमुख कारण रही। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों और स्थिर आपूर्ति के कारण भारतीय रिफाइनरियां रूसी तेल को प्राथमिकता दे रही हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी में अप्रैल की तुलना में मई में रूसी कच्चे तेल की अनलोडिंग 36 प्रतिशत बढ़ी। वहीं जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में रूसी तेल की डिलीवरी 14 प्रतिशत अधिक रही। इससे संकेत मिलता है कि देश के प्रमुख रिफाइनिंग केंद्रों में रूसी तेल की मांग लगातार बनी हुई है।

न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने नवंबर 2025 के अंत में रूसी तेल आयात अस्थायी रूप से रोक दिया था, लेकिन मार्च 2026 से उन्होंने फिर से खरीद शुरू कर दी। मई में न्यू मैंगलोर रिफाइनरी में रूसी तेल की आपूर्ति 13 प्रतिशत बढ़ी, जबकि विशाखापत्तनम रिफाइनरी में यह वृद्धि 42 प्रतिशत दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार रूस के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन रहा, जिसने मई 2026 में रूस के कुल निर्यात का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा खरीदा। भारत 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। इसके बाद तुर्किये और यूरोपीय संघ का स्थान रहा।

CREA ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि यूरोपीय संघ द्वारा रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद रूसी तेल से तैयार कुछ पेट्रोलियम उत्पाद विभिन्न मार्गों से यूरोपीय बाजारों तक पहुंचते रहे। मई 2026 में ऐसे कई तेल उत्पादों की खेप यूरोपीय बंदरगाहों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप आयात नीति पर आगे बढ़ रहा है। रूस से बढ़ते आयात ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आने वाले समय में भी यह रुझान जारी रह सकता है।