BS7 उत्सर्जन नियम: क्या भारत में डीजल कारों का दौर खत्म होने की ओर?

भारत में प्रस्तावित BS7 उत्सर्जन मानक डीजल कारों के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ रहे हैं। नए नियम डीजल इंजनों पर सीधे प्रतिबंध नहीं लगाएंगे, लेकिन उनकी तकनीकी जटिलता और बढ़ती लागत के कारण कई लोकप्रिय मॉडल प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में ऑटो कंपनियां हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

Jul 29, 2026 - 12:25
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BS7 उत्सर्जन नियम: क्या भारत में डीजल कारों का दौर खत्म होने की ओर?

UNITED NEWS OF ASIA. भारत में एक समय ऐसा था जब डीजल कारें ऑटोमोबाइल बाजार पर पूरी तरह हावी थीं। बेहतर माइलेज, अधिक टॉर्क और लंबी दूरी तय करने की क्षमता के कारण ग्राहकों की पहली पसंद डीजल इंजन हुआ करते थे। करीब एक दशक पहले नई कारों की बिक्री में डीजल वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। लेकिन बदलते पर्यावरणीय नियम, पेट्रोल और डीजल की कीमतों के बीच कम होता अंतर तथा इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की बढ़ती लोकप्रियता ने बाजार की तस्वीर बदल दी है। अब प्रस्तावित BS7 उत्सर्जन मानक इस बदलाव को और तेज कर सकते हैं।

BS7 ऐसे नए उत्सर्जन मानक हैं, जिनका उद्देश्य वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण, जहरीली गैसों और पार्टिकुलेट मैटर को पहले से अधिक नियंत्रित करना है। हालांकि सरकार ने अभी तक BS7 लागू करने की अंतिम तारीख घोषित नहीं की है, लेकिन ऑटोमोबाइल कंपनियों को भविष्य की तैयारियां शुरू करने के संकेत मिल चुके हैं। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो से तीन वर्षों में ये नियम लागू हो सकते हैं।

BS7 लागू होने का मतलब यह नहीं है कि सरकार डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। लेकिन इन मानकों को पूरा करने के लिए डीजल इंजनों में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे। कंपनियों को एडवांस एग्जॉस्ट गैस री-सर्कुलेशन सिस्टम, अधिक क्षमता वाले पार्टिकुलेट फिल्टर और AdBlue जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इन बदलावों से उत्पादन लागत काफी बढ़ जाएगी, जिसका असर सीधे वाहनों की कीमत पर पड़ेगा। विशेष रूप से कम बजट वाली डीजल कारों के लिए यह लागत व्यावसायिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।

ऑटो विशेषज्ञों का मानना है कि यदि BS7 लागू होता है तो कई लोकप्रिय डीजल मॉडल प्रभावित हो सकते हैं। इनमें टोयोटा इन्वोवा क्रिस्टा और फॉर्च्यूनर के डीजल इंजन, टाटा हैरियर, सफारी, जीप कम्पास, एमजी हेक्टर में इस्तेमाल होने वाला 2.0 लीटर डीजल इंजन और महिंद्रा थार, स्कॉर्पियो-एन तथा XUV700 का 2.2 लीटर mHawk इंजन शामिल हैं। हालांकि अभी किसी भी वाहन निर्माता ने इन मॉडलों को बंद करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

इसी संभावना को देखते हुए वाहन निर्माता कंपनियां अपनी रणनीति बदल रही हैं। अब उनका फोकस केवल डीजल तकनीक पर नहीं, बल्कि स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास पर है। विशेष रूप से प्लग-इन हाइब्रिड तकनीक को लंबी दूरी की यात्रा के लिए डीजल का प्रभावी विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इसमें इलेक्ट्रिक मोटर और पेट्रोल इंजन दोनों का संयोजन मिलता है।

आने वाले वर्षों में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में डीजल वाहनों की संख्या कम हो सकती है, लेकिन उनका अस्तित्व पूरी तरह समाप्त होने की संभावना फिलहाल नहीं है। BS7 नियम निश्चित रूप से डीजल तकनीक को अधिक महंगा और जटिल बनाएंगे, जिससे कंपनियों और ग्राहकों दोनों की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। भविष्य में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहन भारतीय बाजार की नई दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते दिखाई देंगे।