युद्ध की शुरुआत के बाद सबसे पहले एलपीजी (LPG) की उपलब्धता को लेकर कई जगहों पर किल्लत की खबरें सामने आईं। कई शहरों में लोग गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। इसके बाद 24 मार्च से पेट्रोल और डीजल को लेकर भी अफवाहें तेजी से फैलने लगीं, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए।
अफवाहों के चलते देश के विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर अचानक भीड़ बढ़ गई। लोग अपने वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए लंबी-लंबी कतारों में लग गए। कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पेट्रोल पंपों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
हालांकि, केंद्र सरकार और संबंधित विभागों ने इन अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह सामान्य रूप से काम कर रही है। लोगों से अपील की गई है कि वे घबराएं नहीं और अफवाहों पर ध्यान न दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता जरूर बढ़ सकती है, लेकिन भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए पर्याप्त भंडारण और वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित कर रखी है। ऐसे में तत्काल किसी प्रकार की कमी की आशंका नहीं है।
सरकार ने यह भी कहा है कि अफवाहों के कारण कृत्रिम संकट की स्थिति बन जाती है, जिससे वास्तविक आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए नागरिकों को संयम बनाए रखने और जरूरत के अनुसार ही ईंधन लेने की सलाह दी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। कई राज्यों में स्थानीय प्रशासन ने पेट्रोल पंपों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है।
कुल मिलाकर, इजराइल-ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर भले ही वैश्विक बाजारों पर दिख रहा हो, लेकिन भारत में फिलहाल ईंधन की कोई वास्तविक कमी नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अफवाहों से बचें और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें, ताकि अनावश्यक घबराहट और अव्यवस्था से बचा जा सके।