जानकारी के अनुसार रतलाम निवासी गर्वित चोरड़िया श्री गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल का छात्र है। उसने माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में हिस्सा लिया था। हाल ही में घोषित परीक्षा परिणाम में बिजनेस विषय में उसे केवल 13 अंक दिए गए, जिसके चलते उसे पूरक परीक्षा के लिए पात्र घोषित कर दिया गया। रिजल्ट देखकर छात्र और उसके परिजन हैरान रह गए, क्योंकि छात्र का प्रदर्शन सामान्य रूप से बेहतर माना जा रहा था।
परिजनों को जब परिणाम पर संदेह हुआ तो उन्होंने संबंधित विषय की उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने के लिए आवेदन किया। उत्तर पुस्तिका सामने आने के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। कॉपी की जांच करने वाले परीक्षक ने छात्र को कुल 73 अंक दिए थे, लेकिन अंकों का कुल जोड़ करते समय 60 अंक कम जोड़ दिए गए। इसी तकनीकी और मानवीय त्रुटि के कारण अंतिम परिणाम में छात्र को केवल 13 अंक दर्शाए गए और उसे पूरक घोषित कर दिया गया।
इस गलती के कारण छात्र और उसके परिवार को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते उन्होंने कॉपी नहीं निकलवाई होती और रिटोटलिंग के लिए आवेदन नहीं किया होता, तो छात्र को अनावश्यक रूप से पूरक परीक्षा देनी पड़ती। बाद में छात्र द्वारा रिटोटलिंग के लिए आवेदन किया गया, जिसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए अंक सुधार किए और गर्वित चोरड़िया को 73 अंक प्रदान कर उत्तीर्ण घोषित कर दिया।
इस मामले ने बोर्ड परीक्षा परिणामों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को परीक्षा परिणाम जारी करने से पहले कई स्तरों पर जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि किसी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो। एक छोटी सी लापरवाही किसी छात्र के आत्मविश्वास और करियर पर गहरा असर डाल सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब परीक्षा परिणामों में इस तरह की त्रुटियां सामने आई हों। उन्होंने बोर्ड से मांग की है कि मूल्यांकन और रिजल्ट प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए। फिलहाल छात्र के सही अंक जारी होने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है, लेकिन इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।