बंगाल चुनाव से पहले नुसरत जहां ED के सामने पेश, फ्लैट घोटाले में जांच तेज

नुसरत जहां को फ्लैट धोखाधड़ी मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के दफ्तर में पेश होना पड़ा। मामला 2014-15 के कथित रियल एस्टेट घोटाले से जुड़ा है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों से पैसे लेकर फ्लैट न देने का आरोप है।

Apr 22, 2026 - 16:32
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बंगाल चुनाव से पहले नुसरत जहां ED के सामने पेश, फ्लैट घोटाले में जांच तेज

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी मामला सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कार्यालय में पेश हुईं। उन्हें फ्लैट धोखाधड़ी से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए तलब किया गया था।

नुसरत जहां सुबह कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में ED दफ्तर पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ अभिनेता यश दासगुप्ता भी मौजूद थे। यह मामला राजारहाट क्षेत्र में कथित रियल एस्टेट घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को फ्लैट देने के नाम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।

बताया जा रहा है कि यह मामला वर्ष 2014-15 का है। आरोप है कि एक रियल एस्टेट कंपनी के जरिए कई लोगों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से फ्लैट दिलाने के नाम पर लाखों रुपये लिए गए, लेकिन न तो उन्हें फ्लैट दिए गए और न ही पैसा वापस किया गया। इस मामले में 7 Sense International नाम की कंपनी का भी जिक्र सामने आया है, जिससे नुसरत जहां के जुड़े होने का दावा किया गया है।

इस पूरे मामले की शिकायत भाजपा नेता शंकुदेब पांडा ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि कंपनी ने इंडियन ओवरसीज बैंक के सैकड़ों कर्मचारियों सहित 400 से अधिक लोगों से मोटी रकम ली, लेकिन उन्हें वादा किया गया आवास नहीं मिला। शिकायत के आधार पर ED ने जांच शुरू की और इसी क्रम में नुसरत जहां को समन जारी किया गया।

ED अब इस बात की जांच कर रही है कि कंपनी के संचालन में किसकी क्या भूमिका थी और क्या वास्तव में निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां और कैसे किया गया।

हालांकि, नुसरत जहां ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है। उनका कहना है कि उनका इस मामले से कोई सीधा संबंध नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है। ऐसे में इस तरह के मामलों का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है। विपक्ष जहां इसे बड़ा घोटाला बता रहा है, वहीं सत्ताधारी दल इस मामले को राजनीतिक साजिश करार दे सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ED की जांच आगे और गहराई तक जा सकती है और आने वाले समय में इस मामले में नए खुलासे भी हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला न केवल कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बन गया है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।