कवर्धा वन मंडल में एआई प्रशिक्षण कार्यशाला, वन प्रबंधन में तकनीक के नए युग की शुरुआत

कवर्धा वन मंडल में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में आधुनिक तकनीकों के उपयोग से वन प्रबंधन, रिपोर्टिंग और निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

May 9, 2026 - 12:58
 0  2
कवर्धा वन मंडल में एआई प्रशिक्षण कार्यशाला, वन प्रबंधन में तकनीक के नए युग की शुरुआत

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l वनमंडल कवर्धा में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित आधुनिक तकनीकों पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला वनमंडलाधिकारी (DFO) निखिल अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य वन प्रबंधन को तकनीकी रूप से अधिक सशक्त और प्रभावी बनाना था।

कार्यशाला में रायपुर से आए AI ट्रेनर शिवम बंसल ने प्रतिभागियों को विभिन्न आधुनिक AI टूल्स की उपयोगिता और उनके व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों, रिपोर्ट तैयार करने, डेटा विश्लेषण और मैदानी स्तर पर वन सुरक्षा कार्यों को अधिक तेज और सटीक बनाया जा सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रमुख AI टूल्स जैसे Gemini, NotebookLM, Claude और Vanmitra के बारे में विस्तार से बताया गया। Gemini AI को एक बहुभाषी और शक्तिशाली टूल बताया गया, जो जटिल रिपोर्ट तैयार करने, डेटा विश्लेषण करने और विभागीय पत्राचार को सरल बनाने में मदद करता है। इसके उपयोग से वन विभाग के दैनिक कार्यों में समय की बचत और कार्यकुशलता में वृद्धि संभव है।

NotebookLM के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह टूल बड़े दस्तावेजों, गजट और शोध सामग्री को संक्षेप में प्रस्तुत करने में सक्षम है। वन विभाग के पुराने रिकॉर्ड और लंबी गाइडलाइंस से तुरंत आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में यह अत्यंत उपयोगी साबित हो सकता है।

Claude AI को इसकी तर्क क्षमता और रचनात्मक लेखन शैली के लिए उपयोगी बताया गया। यह जटिल नीतिगत दस्तावेजों के विश्लेषण और प्रभावी संचार में मदद करता है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और मजबूत बनती है।

इसके अलावा वनमित्र (Vanmitra) टूल को विशेष रूप से वन विभाग के मैदानी कार्यों के लिए उपयोगी बताया गया। यह वन अपराधों की रिपोर्टिंग, वृक्षारोपण की निगरानी और वन संरक्षण गतिविधियों की ट्रैकिंग में तकनीकी सहायता प्रदान करता है, जिससे वन सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होती है।

वनमंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में तकनीक को अपनाना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि AI टूल्स के उपयोग से न केवल कार्यकुशलता बढ़ेगी, बल्कि वन सुरक्षा, वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता में भी सुधार आएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से इन तकनीकों को अपने दैनिक कार्यों में शामिल करने की अपील की।

कार्यशाला में उपवनमंडलाधिकारी कवर्धा, सहसपुर लोहारा और पंडरिया सहित भोरमदेव अभयारण्य की अधीक्षक, परिक्षेत्र अधिकारी, लिपिकीय स्टाफ और कंप्यूटर ऑपरेटर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता जताई।

यह कार्यशाला वन विभाग में डिजिटल परिवर्तन और आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में वन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाएगी।