होर्मुज में तनाव बढ़ा: ईरान ने दो विदेशी जहाज जब्त किए, अमेरिका-इजराइल कनेक्शन का दावा

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को जब्त कर लिया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया है कि इन जहाजों का संबंध अमेरिका और इजराइल से है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

Apr 22, 2026 - 19:29
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होर्मुज में तनाव बढ़ा: ईरान ने दो विदेशी जहाज जब्त किए, अमेरिका-इजराइल कनेक्शन का दावा

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो विदेशी जहाजों को अपने नियंत्रण में ले लिया। यह कार्रवाई ईरान की शक्तिशाली सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा की गई है, जिसने इन जहाजों को अमेरिका और इजराइल से जुड़ा बताया है।

ईरान के अनुसार, यह कदम 48 घंटे पहले उसके एक जहाज पर हुए हमले के जवाब में उठाया गया है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि जिन जहाजों को जब्त किया गया है, उनमें से एक पर लाइबेरिया और दूसरे पर पनामा का झंडा था। हालांकि, दोनों जहाजों का संचालन कथित रूप से उन कंपनियों द्वारा किया जा रहा था, जिनका संबंध अमेरिका और इजराइल से बताया जा रहा है।

IRGC ने कहा कि इन जहाजों ने होर्मुज में अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन किया, जिसके चलते यह कार्रवाई आवश्यक हो गई। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इन जहाजों के नाम MSC Francesca और Epaminodes बताए गए हैं। साथ ही एक तीसरे जहाज, जो ग्रीस से जुड़ा बताया जा रहा है, पर भी कार्रवाई की खबर सामने आई है, हालांकि उसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इस कार्रवाई को लेकर ईरान ने संसद में एक 12-सूत्रीय योजना भी पेश की है, जिसके तहत होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई की बात कही गई है। इस योजना में यह भी शामिल है कि इजराइल से जुड़े किसी भी जहाज को इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यहां तक कि “मित्र देशों” के जहाजों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, यदि वे नियमों का पालन नहीं करते।

होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल परिवहन होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की सैन्य या राजनीतिक गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

इस घटनाक्रम से पहले 20 अप्रैल को अमेरिकी सेना ने ईरान के एक जहाज को जब्त किया था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस जहाज पर कथित तौर पर मिसाइल निर्माण से जुड़ा सामान था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जवाबी कार्रवाइयों से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और वैश्विक व्यापार प्रभावित हो सकता है। खासकर ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।

फिलहाल, इस स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह तनाव कूटनीतिक स्तर पर सुलझता है या फिर और गहराता है।