बंगाल चुनाव में हिंसा के बीच रिकॉर्ड मतदान: दोपहर 3 बजे तक 78% से ज्यादा वोटिंग, गर्मी भी नहीं रोक पाई उत्साह
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हिंसा और भीषण गर्मी के बावजूद रिकॉर्ड मतदान देखने को मिला। चुनाव आयोग के अनुसार दोपहर 3 बजे तक करीब 78.77% मतदान दर्ज किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के दौरान भारी उत्साह के साथ मतदान जारी है। बमबाजी, पत्थरबाजी और लाठीचार्ज जैसी हिंसक घटनाओं के बीच भी मतदाताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। भीषण गर्मी के बावजूद लोगों ने बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंचकर लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार दोपहर 3 बजे तक राज्य में लगभग 78.77% मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा पिछले चुनावों की तुलना में काफी अधिक माना जा रहा है और इससे संकेत मिलता है कि इस बार चुनाव को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह है।
हालांकि, मतदान के दौरान कई इलाकों से हिंसा की खबरें भी सामने आईं। कुछ जगहों पर बम फेंके जाने, पत्थरबाजी और झड़पों की घटनाएं हुईं, जिससे तनाव का माहौल बना रहा। सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कार्रवाई की और कई स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किए गए।
पहले चरण में राज्य के 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। इनमें उत्तर बंगाल, दक्षिण-मध्य बंगाल और जंगलमहल क्षेत्र के जिले शामिल हैं। प्रमुख जिलों में मुर्शिदाबाद, मालदा, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, बांकुड़ा, पुरुलिया और पश्चिम मेदिनीपुर शामिल हैं।
इन सीटों पर कुल 1,452 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि लगभग 3.60 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग कर रहे हैं। पूरे राज्य में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 210 सामान्य, 68 अनुसूचित जाति और 10 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
इस बार चुनाव में पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की संख्या भी उल्लेखनीय है। करीब पांच लाख नए वोटर्स पहली बार मतदान कर रहे हैं, वहीं 85 वर्ष से अधिक आयु के 3.79 लाख वरिष्ठ मतदाता भी इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं।
मतदान के लिए कुल 44,376 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं, जहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस की तैनाती के बावजूद कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा देखने को मिली, लेकिन इससे मतदान की गति पर ज्यादा असर नहीं पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान होना इस बात का संकेत है कि राज्य की जनता इस चुनाव को लेकर गंभीर है और सत्ता परिवर्तन या स्थिरता को लेकर अपनी भूमिका निभाना चाहती है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के इस चुनावी चरण में जहां एक ओर हिंसा ने चिंता बढ़ाई है, वहीं दूसरी ओर रिकॉर्ड मतदान ने लोकतंत्र की मजबूती को भी प्रदर्शित किया है। आने वाले चरणों में भी इसी तरह के उत्साह और सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा होगी।