प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली इतिहास, विदेशी आक्रांताओं द्वारा किए गए हमलों और मंदिर के पुनर्निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने देश के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी अपने विचार साझा किए।
बालोद के कपिलेश्वर मंदिर में कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और महाआरती से हुई। मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट और दीपों से सजाया गया था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान रंगोली प्रतियोगिता, शिव तांडव नृत्य और भजन गायन की मनमोहक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। कलाकारों और प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुति से उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। विशेष रूप से शिव तांडव नृत्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर, नगर पालिका परिषद बालोद अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष तोमन साहू और जनपद पंचायत बालोद अध्यक्ष सरस्वती टेमरिया ने जिलेवासियों को “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि आज ही के दिन 75 वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हुआ था। इस ऐतिहासिक अवसर को देशभर में स्वाभिमान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। वक्ताओं ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा लिए गए पुनर्निर्माण संकल्प और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐतिहासिक भूमिका का भी उल्लेख किया।
कार्यक्रम में अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक, अजय किशोर लकरा, डिप्टी कलेक्टर प्राची ठाकुर, नगर पालिका बालोद उपाध्यक्ष कमलेश सोनी, गिरिजेश गुप्ता सहित कई जनप्रतिनिधि, पार्षदगण और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
इस दौरान सोमनाथ संवाद कार्यक्रम और थीम आधारित रंगोली प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन जितेंद्र सोनी ने किया।
धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान के संदेश से जुड़ा यह आयोजन बालोद में श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ।