ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ा: ट्रंप की चेतावनियों पर IRGC का कड़ा जवाब, युद्धविराम पर अनिश्चितता
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों का जवाब देते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है। दो सप्ताह का युद्धविराम खत्म होने के कगार पर है और हालात फिर से टकराव की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, जहां ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। हाल ही में दो सप्ताह के युद्धविराम की अवधि समाप्त होने के कगार पर है, और इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका और इजरायल को लेकर कड़ा बयान जारी किया है।
ईरान के सरकारी मीडिया के माध्यम से IRGC के केंद्रीय मुख्यालय खातम अल-अनबिया के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फागरी का बयान सामने आया। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की आक्रामक कार्रवाई की जाती है, तो ईरानी सशस्त्र बल पूर्व निर्धारित लक्ष्यों पर तुरंत और पूरी ताकत के साथ जवाब देंगे।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर लगातार सख्त बयान दिए जा रहे हैं। इन बयानों के मद्देनजर IRGC ने न केवल अमेरिका बल्कि इजरायल को भी निशाने पर लिया है। जोल्फागरी ने अपने बयान में कहा कि यदि हमला होता है तो “ज़ायोनी शासन” को पहले से कहीं अधिक कड़ा सबक सिखाया जाएगा।
ईरानी सेना ने साफ किया है कि वह किसी भी संभावित हमले के जवाब में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाएगी। इस बयान में यह भी कहा गया कि ईरान अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है और किसी भी दबाव में नहीं झुकेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच युद्धविराम को लेकर स्थिति और भी जटिल हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह का सीजफायर बुधवार, 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला था। हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने देर रात घोषणा की कि पाकिस्तान के अनुरोध पर अमेरिका इस युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान से एक संयुक्त प्रस्ताव की प्रतीक्षा कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, ईरान ने फिलहाल आगे की वार्ता में रुचि नहीं दिखाई है, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित हो गई है। इस बीच व्हाइट हाउस ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की इस्लामाबाद यात्रा को भी स्थगित कर दिया है, जो वार्ता के अगले दौर के लिए प्रस्तावित थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तीखी बयानबाजी और अनिश्चित कूटनीतिक स्थिति से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। यदि युद्धविराम टूटता है, तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, दोनों पक्षों के सख्त रुख और बयानबाजी के बीच यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या फिर यह तनाव एक बड़े संघर्ष में बदल जाता है।