रायपुर में भारत मुक्ति संयुक्त मोर्चा का महाआंदोलन, सात प्रमुख मुद्दों को लेकर सौंपा ज्ञापन

रायपुर में भारत मुक्ति संयुक्त मोर्चा के बैनर तले विभिन्न संगठनों ने सात ज्वलंत मुद्दों को लेकर महाआंदोलन किया। टिकेश्वर साहू के नेतृत्व में ओबीसी संयोजन समिति सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

Apr 22, 2026 - 12:57
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रायपुर में भारत मुक्ति संयुक्त मोर्चा का महाआंदोलन, सात प्रमुख मुद्दों को लेकर सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर रायपुर l रायपुर की राजधानी में सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर एक बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला, जहां भारत मुक्ति संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर अपनी मांगों को बुलंद किया। यह महाआंदोलन तूता माना धरना स्थल पर आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेशभर से करीब 500 पदाधिकारी और समर्थकों ने भाग लिया।

इस आंदोलन में भारत मुक्ति मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद और राष्ट्रीय गुरु घासीदास सतनाम क्रांति मोर्चा सहित कई संगठनों ने संयुक्त रूप से भागीदारी निभाई। आंदोलन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ के सात प्रमुख ज्वलंत मुद्दों को उठाना और सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना था।

इस अवसर पर दिल्ली से राष्ट्रीय स्तर के नेता वामन मेश्राम, अनिल माने और चौधरी विकास पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को व्यापक रूप दिया।

ओबीसी संयोजन समिति छत्तीसगढ़ के संस्थापक सदस्य टिकेश्वर साहू ने आंदोलन को संबोधित करते हुए कई गंभीर मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पारित धर्म स्वतंत्रता कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 25 के विपरीत है। उनके अनुसार, यह कानून अल्पसंख्यक समाज में भय का वातावरण पैदा कर रहा है।

इसके अलावा उन्होंने ओबीसी वर्ग की जातिवार जनगणना को एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया और कहा कि यह लंबे समय से लंबित है, जिसे लेकर समाज में असंतोष है। उन्होंने आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया और आरोप लगाया कि बिना सहमति के इन संसाधनों का अधिग्रहण किया जा रहा है, जिससे आदिवासी समुदाय प्रभावित हो रहा है।

आंदोलन में बलौदा बाजार कांड का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया, जिसमें सतनामी समाज के 267 युवकों को जेल में डालने की बात कही गई। इसके साथ ही शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया गया, जिसमें 2011 की शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े मामलों के कारण कई शिक्षकों की नौकरी खतरे में बताई गई।

इन सभी मुद्दों पर व्यापक चर्चा के बाद आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने अपनी मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

इस महाआंदोलन में बल्दूराम साहू, प्रदीप विश्वकर्मा, चेतन साखरे, विक्रम साहू, तरुण कुमार साहू, सदानंद साहू, हेमंत यादव, भागी सेन, विशेश्वर ध्रुव, राजू भार्गव, शंकर भार्गव सहित अनेक कार्यकर्ता शामिल हुए।

यह आंदोलन न केवल सामाजिक मुद्दों को उजागर करने का माध्यम बना, बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर उनकी आवाज को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने का भी कार्य किया। आने वाले समय में इस आंदोलन के प्रभाव और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।