पिपरा गांव में बिजली संकट गहराया: बार-बार जल रहे ट्रांसफार्मर, अंधेरे में जीने को मजबूर 3000 ग्रामीण
बिहार के बांका जिले के भिलाई पंचायत अंतर्गत पिपरा गांव में बिजली व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। लगभग 3000 की आबादी वाला गांव बार-बार ट्रांसफार्मर जलने, जर्जर तारों और तकनीकी खामियों के कारण लंबे समय से बिजली संकट झेल रहा है। ग्रामीणों ने बिजली व्यवस्था के तकनीकी ऑडिट, उच्च गुणवत्ता वाले केबल और स्थायी समाधान की मांग की है।
पिपरा गांव में बिजली संकट गहराया: बार-बार जल रहे ट्रांसफार्मर, अंधेरे में जीने को मजबूर 3000 ग्रामीण
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, बांका (बिहार)। भिलाई पंचायत अंतर्गत पिपरा गांव की बिजली व्यवस्था ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। लगभग 3000 की आबादी वाला यह गांव वर्षों से बिजली संबंधी समस्याओं का सामना कर रहा है, लेकिन हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हाल ही में ट्रांसफार्मर जल जाने की घटना के बाद पूरे गांव की बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में बिजली वितरण के लिए लगाए गए कई तार पुराने और जर्जर हो चुके हैं। खंभों से घरों तक पहुंचने वाली लाइनें खराब गुणवत्ता की होने के कारण अक्सर तकनीकी खराबियां उत्पन्न होती हैं। इससे बिजली आपूर्ति बाधित होती है और ट्रांसफार्मर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में उच्च गुणवत्ता वाले केबल तार लगाए जाने चाहिए और इस कार्य की निगरानी जनप्रतिनिधियों एवं वार्ड सदस्यों द्वारा की जानी चाहिए ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों ने बार-बार फेज परिवर्तन की समस्या भी उठाई है। उनका कहना है कि बिना किसी ठोस तकनीकी कारण के फेज बदलने से बिजली व्यवस्था असंतुलित हो जाती है। इससे लाइन पर अतिरिक्त भार पड़ता है और ट्रांसफार्मर के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है।
गांव की स्थिति ऐसी हो गई है कि बिजली अब ग्रामीणों के लिए एक अनिश्चित सुविधा बनकर रह गई है। रात में कुछ घंटों के लिए बिजली आने के बाद सुबह होते-होते आपूर्ति बंद हो जाती है। कभी ट्रांसफार्मर खराब होने, कभी तार टूटने और कभी लाइन फॉल्ट के कारण लोग लगातार परेशान हो रहे हैं।
भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, किसानों को सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तथा छोटे व्यापारियों का कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग की ओर से केवल अस्थायी मरम्मत की जाती है, जबकि स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पिपरा गांव की बिजली व्यवस्था का विस्तृत तकनीकी ऑडिट कराया जाए, जर्जर तारों को बदलकर उच्च गुणवत्ता वाले केबल लगाए जाएं, ट्रांसफार्मर की क्षमता बढ़ाई जाए तथा बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी गांव का दौरा कर समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करें।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। यदि समय रहते बिजली संकट का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में जनआंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक पिपरा गांव के लोग अंधेरे और अव्यवस्था के बीच जीवन जीने को मजबूर रहेंगे? क्या बिजली विभाग इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान करेगा या फिर ट्रांसफार्मर जलने और बिजली गुल होने की घटनाएं इसी तरह जारी रहेंगी?