केसली में पशु बाजार बचाने और खाद संकट को लेकर प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

सागर जिले की केसली तहसील में स्थानीय नागरिकों, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक पशु बाजार को बचाने, किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के विरोध में राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं होने पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी।

Jul 23, 2026 - 17:46
Jul 23, 2026 - 17:47
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केसली में पशु बाजार बचाने और खाद संकट को लेकर प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA. योगेश विश्वकर्मा, सागर l मध्य प्रदेश के सागर जिले की केसली तहसील में गुरुवार को स्थानीय नागरिकों, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और महामहिम राष्ट्रपति के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से केसली के ऐतिहासिक पशु बाजार को संरक्षित रखने, किसानों के लिए तत्काल खाद एवं बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में अपनी बात रखी गई। बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी में सौंपे गए इस ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से शीघ्र समाधान की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया कि केसली का पशु बाजार क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान होने के साथ-साथ आसपास के दर्जनों गांवों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। वर्षों से यहां लगने वाले इस बाजार के माध्यम से किसान, पशुपालक और व्यापारी अपने पशुओं की खरीद-बिक्री करते रहे हैं। इससे स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है और हजारों लोगों की आजीविका इस बाजार से जुड़ी हुई है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिस स्थान पर लंबे समय से पशु बाजार आयोजित होता आ रहा है, उसी भूमि पर अब नए जनपद पंचायत भवन का निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य जारी रहा तो पशु बाजार का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और क्षेत्र के किसानों एवं पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।

ज्ञापन में मांग की गई कि प्रस्तावित निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा जनपद पंचायत भवन के लिए किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन ऐसे विकास से क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर और लोगों की आजीविका प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासन ऐसा समाधान निकाले जिससे विकास कार्य भी हो और पशु बाजार भी सुरक्षित बना रहे।

ज्ञापन का दूसरा प्रमुख विषय किसानों के सामने उत्पन्न खाद और बीज का संकट रहा। प्रतिनिधियों ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान किसान खाद और बीज की कमी से जूझ रहे हैं। कई स्थानों पर किसानों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है, जबकि अनेक किसानों को समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि खेती का यह समय किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर खाद और बीज उपलब्ध नहीं होंगे तो बुवाई और फसल उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि जिले में खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा वितरण व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए ताकि किसी भी किसान को परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय स्तर के एक मुद्दे का भी उल्लेख करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में कहा गया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और छात्रों को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रखने का अधिकार है। प्रतिनिधियों ने मांग की कि छात्रों से जुड़े मामलों का समाधान संवाद और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाए।

ज्ञापन सौंपने पहुंचे लोगों ने कहा कि लोकतंत्र में जनभावनाओं का सम्मान होना चाहिए और सरकारों को जनता की समस्याओं के समाधान के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य करना चाहिए। उनका कहना था कि चाहे किसानों की समस्या हो, स्थानीय विकास का मुद्दा हो या छात्रों की मांग, सभी विषयों पर सकारात्मक पहल आवश्यक है।

तहसील कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, किसान और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। ज्ञापन सौंपने वालों में अनिरुद्ध सिंह, संजय बृजपुरिया, गोवर्धन तिवारी, वीरेंद्र लोधी, राजकुमार (भूरे) सरपंच, राजेश सिंह कुकवारा, दीप्तिमणि चौबे, ओमप्रकाश सिंह राजपूत, वीरेंद्र लोधी, अनवर खान, अखलेश जैन, अरविंद लोधी, अर्चना अहिरवार, अफजल खान, अर्पित यादव, पलटू राजा, पंकज राय, जंगबहादुर, सतीश लोधी, पुष्पेंद्र ठाकुर, कृष्णा उपाध्याय, सत्यम प्रजापति सहित बड़ी संख्या में नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोग शामिल रहे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रशासन का ध्यान जनहित के मुद्दों की ओर आकर्षित करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित विभाग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐतिहासिक पशु बाजार को बचाने, किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और अन्य उठाए गए मुद्दों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।

स्थानीय नागरिकों का मानना है कि पशु बाजार केवल व्यापार का केंद्र नहीं, बल्कि केसली की सामाजिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसके संरक्षण के साथ-साथ किसानों की समस्याओं का त्वरित समाधान और जनभावनाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से इन सभी मुद्दों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई है।