AI पार्क MoU पर सियासी घमासान: अखिलेश यादव का CM योगी पर तंज

लखनऊ में AI पार्क से जुड़े MoU को लेकर सियासत गरमा गई है। अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

Mar 25, 2026 - 17:41
 0  2
AI पार्क MoU पर सियासी घमासान: अखिलेश यादव का CM योगी पर तंज

UNITED NEWS OF ASIA. लखनऊउत्तर प्रदेश में AI पार्क की स्थापना को लेकर हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए तंज भरे अंदाज में कहा कि सरकार को MoU साइन करने से पहले कम से कम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से ही संबंधित कंपनी की साख और पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी ले लेनी चाहिए थी। उन्होंने इशारों-इशारों में सरकार की निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि गलत सलाहकारों के कारण सरकार की छवि प्रभावित हो रही है।

उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि नेताओं को अपने आसपास ऐसे लोगों से बचकर रहना चाहिए, जो निजी स्वार्थ के लिए गलत जानकारी देकर फैसलों को प्रभावित करते हैं। अखिलेश यादव ने ‘AI’ शब्द पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सिर्फ ‘Artificial Intelligence’ ही नहीं, बल्कि ‘Artificial Image’ यानी कृत्रिम छवि का भी प्रतीक बनता जा रहा है।

इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सत्तापक्ष की ओर से भी पलटवार की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए इस तरह के बयानबाजी का दौर और तेज हो सकता है। AI पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को लेकर पारदर्शिता और विश्वसनीयता का मुद्दा भी अब चर्चा का विषय बन गया है।

हालांकि, सरकार की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, सरकार इस परियोजना को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है और इसे प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम मानती है।

AI पार्क को लेकर सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर सृजित होंगे और तकनीकी क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिलेगी। वहीं विपक्ष का आरोप है कि बिना उचित जांच-पड़ताल के किए गए समझौते भविष्य में समस्याएं खड़ी कर सकते हैं।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में विकास परियोजनाएं भी अब सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।