महिला कर्मचारी से प्रताड़ना की शिकायत के बाद व्याख्याता निलंबित, आदेश की अवहेलना भी बनी कार्रवाई का आधार
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के पीएम श्री सेजेस विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता सुशील कुमार चौरसिया को महिला कर्मचारी की शिकायत और स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच अभी जारी है।
UNITED NEWS OF ASIA. जावेद खान, मानपुर l मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। जिले के पीएम श्री सेजेस विद्यालय, अंबागढ़ चौकी में पदस्थ व्याख्याता (एल.बी.) सुशील कुमार चौरसिया को महिला कर्मचारी द्वारा कार्यस्थल पर मानसिक प्रताड़ना, दुर्व्यवहार और धमकी देने की शिकायत के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता भी प्रदान किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार विद्यालय में कार्यरत संविदा महिला सहायक ग्रेड-03 कर्मचारी ने 27 जनवरी 2026 को कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में व्याख्याता पर कार्यस्थल पर मानसिक प्रताड़ना, लगातार शोषण, दुर्व्यवहार और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। मामले को गंभीर मानते हुए कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय जांच समिति गठित की गई, जिसने मामले की जांच शुरू की।
जांच प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने 23 मार्च 2026 को आदेश जारी कर सुशील कुमार चौरसिया को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, विचारपुर में व्यवस्था के तहत अध्यापन कार्य करने के निर्देश दिए थे। विभाग के अनुसार संबंधित व्याख्याता ने इस आदेश का पालन नहीं किया और नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं किया।
निलंबन आदेश में उल्लेख किया गया है कि विभागीय आदेश की अवहेलना करना पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का परिचायक है। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों की विभागीय जांच अभी जारी है। निलंबन को केवल प्रशासनिक कार्रवाई बताया गया है और यह अंतिम निर्णय नहीं माना जाएगा। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखना और कर्मचारियों की शिकायतों का निष्पक्ष निराकरण विभाग की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जांच समिति गठित की गई और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही मामले में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।