तहसीलदार के आदेश की अवहेलना पर सीएमओ को ज्ञापन, निर्माण मामले में कार्रवाई पर उठे सवाल

अंबागढ़ चौकी में खसरा नंबर 147/4 और 147/5 से जुड़े निर्माण अनियमितता मामले में तहसीलदार के आदेश का पालन नहीं होने पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को ज्ञापन जारी किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कई शिकायतों और आरटीआई के बावजूद अब तक अंतिम वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।

Aug 4, 2026 - 13:17
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तहसीलदार के आदेश की अवहेलना पर सीएमओ को ज्ञापन, निर्माण मामले में कार्रवाई पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. जावेद खान, अंबागढ़ l राजनांदगांव जिले के अंबागढ़ चौकी में भवन निर्माण से जुड़े एक मामले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खसरा नंबर 147/4 एवं 147/5 से संबंधित भवन अनुज्ञा और निर्माण अनियमितता के प्रकरण में तहसीलदार द्वारा पूर्व में नगर पंचायत अंबागढ़ चौकी को नियमानुसार जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, आदेश जारी होने के बाद भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर तहसीलदार कार्यालय ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को अलग से ज्ञापन जारी किया है।

जानकारी के अनुसार, तहसीलदार कार्यालय ने 28 जुलाई 2026 को जारी ज्ञापन में कहा कि पूर्व में पारित आदेश का पालन नहीं किया गया है। इस संबंध में सीएमओ को आदेश की अवहेलना पर ध्यान आकर्षित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई की जानकारी तहसील कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह मामला खसरा नंबर 147/4 एवं 147/5 पर कथित निर्माण अनियमितता और भवन अनुज्ञा से जुड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता संजय लाटा का कहना है कि उन्होंने इस मामले में नगर पंचायत, तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कलेक्टर सहित विभिन्न सक्षम अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायत प्रस्तुत की है। इसके बावजूद अब तक अंतिम स्तर पर कोई स्पष्ट वैधानिक कार्रवाई नहीं हुई है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने सुशासन तिहार 2025 और 2026 के दौरान भी इस मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत भी अंतिम कार्रवाई की जानकारी मांगी गई, लेकिन उन्हें अब तक संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। सूचना नहीं मिलने पर उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील भी प्रस्तुत की है।

संजय लाटा का कहना है कि जब तहसीलदार द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किया जा चुका है और उसके बाद आदेश की अवहेलना को लेकर अलग से ज्ञापन भी जारी किया गया है, तब भी यदि अंतिम कार्रवाई नहीं होती है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर विषय बन जाता है। उनका कहना है कि इससे आम नागरिकों का प्रशासनिक व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होता है।

शिकायतकर्ता ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अनुरोध किया है कि संबंधित प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार अंतिम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आदेशों का पालन हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक स्तर पर विचाराधीन है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि तहसीलदार के ज्ञापन के बाद नगर पंचायत प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और संबंधित विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेता है। वहीं, शिकायतकर्ता का कहना है कि जब तक नियमानुसार अंतिम कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

यह मामला प्रशासनिक आदेशों के पालन, जवाबदेही और निर्माण संबंधी नियमों के अनुपालन को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले दिनों में संबंधित विभाग द्वारा उठाए जाने वाले कदम इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।