भारत ने भूटान को दी 43 जर्सी गायें, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा

भारत ने भूटान को 43 जर्सी गायें उपलब्ध कराई हैं। यह पहल दोनों देशों के बीच कृषि और पशुपालन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने से जुड़ी है। भूटान के बूमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में गायें सौंपी गईं। जर्सी नस्ल अपनी दुग्ध उत्पादन क्षमता और दूध में अपेक्षाकृत अधिक फैट के लिए जानी जाती है, हालांकि वास्तविक उत्पादन पशु की नस्ल, स्वास्थ्य, आहार और प्रबंधन पर निर्भर करता है।

Sep 18, 2026 - 17:35
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भारत ने भूटान को दी 43 जर्सी गायें, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा

UNITED NEWS OF ASIA. भारत और भूटान के बीच कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। भारत की ओर से भूटान को 43 जर्सी गायें उपलब्ध कराई गई हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर की 16 और 17 सितंबर की भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसी दौरान पशुपालन और कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग से जुड़ी इस पहल को भी सामने रखा गया। भूटान को दी गई जर्सी गायों को वहां के पशुधन क्षेत्र में नस्ल सुधार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में उपयोग किए जाने की योजना है।

43 जर्सी गायें भूटान के बूमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सौंपी गईं। यह केंद्र भूटान में पशुधन की नस्ल सुधार और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों के लिए काम करता है। भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई गायों का उपयोग प्रजनन कार्यक्रमों में किया जा सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली पशुधन आबादी विकसित करने में मदद मिल सकती है।

जर्सी गाय दुनिया की प्रमुख डेयरी नस्लों में शामिल है। इस नस्ल की खास पहचान इसके दूध में अपेक्षाकृत अधिक मिल्क फैट और ठोस पदार्थों की मात्रा तथा अच्छी दुग्ध उत्पादन क्षमता है। हालांकि किसी गाय द्वारा प्रतिदिन दिए जाने वाले दूध की मात्रा निश्चित नहीं होती। उसका उत्पादन आनुवंशिक क्षमता, उम्र, स्वास्थ्य, पोषण, मौसम, देखभाल और दुग्धावस्था जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। अच्छी देखभाल और उपयुक्त प्रबंधन वाली जर्सी गायों से प्रतिदिन लगभग 15 से 25 लीटर तक दूध मिलना संभव है, जबकि कुछ उच्च उत्पादन वाली गायें इससे अधिक भी दे सकती हैं। इसलिए 30 लीटर या उससे अधिक को हर जर्सी गाय का सामान्य उत्पादन मानना उचित नहीं होगा।

भूटान जैसे पहाड़ी देश में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में उन्नत नस्ल के पशुधन और बेहतर प्रजनन तकनीकों का उपयोग स्थानीय डेयरी क्षेत्र के विकास में योगदान दे सकता है। बूमथांग का नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई गायों से प्रजनन कार्यक्रम को बढ़ाने और स्थानीय पशुपालकों तक बेहतर नस्ल की संतति पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।

इस पहल का लाभ केवल एक केंद्र तक सीमित रहने के बजाय आगे चलकर स्थानीय किसानों और पशुपालकों तक पहुंच सकता है। उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, उन्नत ब्रीडिंग कार्यक्रम से भूटान के करीब 40 हजार किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि वास्तविक लाभ का स्तर कार्यक्रम के विस्तार, प्रजनन परिणाम, पशुपालकों की भागीदारी और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आपसी सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की। जर्सी गायों की उपलब्धता को कृषि और पशुपालन क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। इससे भूटान में डेयरी उत्पादन, पशुधन प्रबंधन और नस्ल सुधार से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही यह पहल दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में तकनीकी और विकासात्मक अनुभव साझा करने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाती है।