ढोढरकसा हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों ने की अनिश्चितकालीन तालाबंदी
महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत ढोढरकसा के शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों, पालकों और विद्यार्थियों का विरोध तेज हो गया है। सात दिन के अल्टीमेटम के बाद भी शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने पर ग्रामीणों ने 18 सितंबर से विद्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी शुरू कर दी। ग्रामीणों का दावा है कि नौ स्वीकृत पदों के मुकाबले स्कूल में फिलहाल केवल एक शिक्षक कार्यरत है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l महासमुंद जिले के पिथौरा तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत ढोढरकसा स्थित शासकीय हाई स्कूल में शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों, पालकों और छात्र-छात्राओं का विरोध अब आंदोलन में बदल गया है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है, जिसके कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की व्यवस्था के लिए सात दिन का समय दिया था। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं होने पर 18 सितंबर से ग्रामीणों ने विद्यालय में अनिश्चितकालीन तालाबंदी शुरू कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि ढोढरकसा शासकीय हाई स्कूल में कुल नौ शिक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में स्कूल का संचालन केवल एक शिक्षक के भरोसे हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2021 में विद्यालय में तीन शिक्षक पदस्थ थे। इनमें से एक शिक्षक को स्वामी आत्मानंद स्कूल बसना में अटैच किया गया, जबकि दूसरे शिक्षक के वर्ष 2023 से अवैतनिक अवकाश पर होने की बात कही गई है। इसके बाद स्कूल में शिक्षकों की संख्या लगातार कम होती गई और वर्तमान में एक ही शिक्षक के भरोसे शैक्षणिक व्यवस्था संचालित होने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि हाल ही में हुई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के दौरान भी ढोढरकसा हाई स्कूल को अतिरिक्त शिक्षक नहीं मिला। उनका कहना है कि जब विद्यालय में स्वीकृत पदों की तुलना में शिक्षकों की संख्या बेहद कम है, तब भी समस्या का समाधान नहीं होना विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।
जानकारी के अनुसार 10 सितंबर को ग्रामीणों ने एसडीएम पिथौरा के माध्यम से महासमुंद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन के जरिए सात दिनों के भीतर विद्यालय में शिक्षकों की पदस्थापना करने की मांग की गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक निर्धारित समय पूरा होने के बावजूद शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने तालाबंदी का निर्णय लिया।
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के सामने कई सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि नौ पद स्वीकृत होने के बावजूद विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे क्यों संचालित हो रहा है। लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। अटैच किए गए शिक्षक को मूल विद्यालय में वापस लाने और अवकाश पर गए शिक्षक के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करने की दिशा में क्या कदम उठाए गए, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि युक्तियुक्तकरण के दौरान विद्यालय की वास्तविक जरूरत का आकलन क्यों नहीं किया गया। साथ ही वे चाहते हैं कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्कूल की स्थिति का निरीक्षण करें और विद्यार्थियों की पढ़ाई को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब इस मामले में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर ग्रामीणों, पालकों और विद्यार्थियों की नजर है।