NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA कार्यालय का दौरा कर सकती है पीठ

NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था में सुधारों की जमीनी स्थिति जानने के लिए NTA के स्थायी कार्यालय का निरीक्षण करने की इच्छा जताई है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सिस्टम, स्टाफ और अन्य व्यवस्थाओं की स्थिति देखने की बात कही। कोर्ट ने सुधारों की प्रगति पर हलफनामा भी मांगा है।

Sep 18, 2026 - 16:07
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NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, NTA कार्यालय का दौरा कर सकती है पीठ

UNITED NEWS OF ASIA. NEET-UG 2026 पेपर लीक से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA की परीक्षा व्यवस्था और उसमें किए जा रहे सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने संकेत दिया कि वह NTA के स्थायी कार्यालय का दौरा कर सकती है और वहां परीक्षा आयोजित करने के लिए तैयार किए गए सिस्टम की वास्तविक स्थिति को देख सकती है। कोर्ट यह भी देखना चाहती है कि व्यवस्था जमीन पर किस तरह काम कर रही है और इसके संचालन के लिए पर्याप्त स्टाफ तथा अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने NTA के नए स्थायी कार्यालय और परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे सुधारों से जुड़ी जानकारी रखी गई। रिपोर्टों के अनुसार, NTA ने दिल्ली के मिंटो रोड क्षेत्र में स्थायी कार्यालय की व्यवस्था की है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया कि केवल कागजों पर व्यवस्था तैयार करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि सिस्टम वास्तव में स्थापित और कार्यशील है या नहीं। पीठ ने सिस्टम, मैनपावर और अन्य व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने की बात कही।

कोर्ट ने परीक्षा व्यवस्था में स्थायी और संस्थागत ढांचे की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि परीक्षा संचालन के लिए स्थायी व्यवस्था, पर्याप्त स्थायी स्टाफ और स्पष्ट जिम्मेदारियों वाला ढांचा जरूरी है। अदालत ने संकेत दिया कि बार-बार किए जाने वाले अस्थायी उपायों के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए जो लंबे समय तक परीक्षा प्रणाली को संचालित करने में सक्षम हो।

सुनवाई में नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स की प्रगति का मुद्दा भी सामने आया। केंद्र की ओर से अदालत को बताया गया कि समिति ने विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है और उसकी पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को समिति की ओर से अब तक किए गए कार्य और प्रगति की जानकारी देने वाला हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके लिए अदालत ने दो सप्ताह का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार से संबंधित समितियों की सिफारिशें केवल रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इन सिफारिशों को वास्तविक रूप से लागू किए जाने की स्थिति की भी निगरानी जरूरी है। अदालत का जोर परीक्षा व्यवस्था को संस्थागत रूप से मजबूत करने और सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन की स्थिति जानने पर है।

NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था और NTA की कार्यप्रणाली में सुधार का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चल रहा है। वर्तमान सुनवाई में अदालत ने NTA की व्यवस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से देखने की संभावना जताई है। साथ ही सुधारों की प्रगति का रिकॉर्ड अदालत के सामने रखने के निर्देश दिए गए हैं। आगे की सुनवाई में NTA की व्यवस्था, उच्चस्तरीय समिति की प्रगति और सुधारों के क्रियान्वयन को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।