बांग्लादेश में गंभीर बिजली संकट, टॉर्च की रोशनी में इलाज और फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित
बांग्लादेश इन दिनों बिजली संकट से जूझ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक कई इलाकों में रोजाना घंटों बिजली कटौती हो रही है, जबकि बिजली की कमी का असर अस्पतालों, आम लोगों और टेक्सटाइल उद्योग पर भी पड़ा है। गैस की कमी के कारण बिजली संयंत्र पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। गारमेंट और निटवेयर सेक्टर में उत्पादन, ऑर्डर और सप्लाई प्रभावित होने की बात सामने आई है।
UNITED NEWS OF ASIA. बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक देश के कई हिस्सों में रोजाना कई घंटे बिजली कटौती हो रही है, जिसका असर आम जनजीवन के साथ-साथ अस्पतालों और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। बिजली संकट की स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुछ स्थानों पर मरीजों के इलाज के दौरान टॉर्च की रोशनी का सहारा लेने की स्थिति सामने आई है। वहीं कई फैक्ट्रियों में बिजली और ईंधन की कमी के चलते उत्पादन प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
बिजली संकट का असर बांग्लादेश के महत्वपूर्ण गारमेंट और टेक्सटाइल सेक्टर पर भी दिखाई दे रहा है। बांग्लादेश के कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में गारमेंट उद्योग की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है। रिपोर्ट में बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन यानी BKMEA के सर्वे का हवाला देते हुए बताया गया है कि 55 प्रतिशत निटवेयर फैक्ट्रियों में ऑर्डर रद्द होने या कम होने की स्थिति सामने आई। वहीं 78 प्रतिशत फैक्ट्रियों में उत्पादन घटने और 87 प्रतिशत इकाइयों में सामान की डिलीवरी प्रभावित होने की बात कही गई है।
बिजली की कमी का सीधा असर उत्पादन क्षमता पर भी पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक निटिंग उत्पादन में करीब 37 से 38 प्रतिशत, डाइंग में 51 प्रतिशत और गारमेंट सिलाई के उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी दर्ज किए जाने की बात कही गई है। इसके अलावा गैस और बिजली की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण करीब 600 टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने की रिपोर्ट भी सामने आई है। इससे निर्यात आधारित उद्योगों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
देश के कई हिस्सों में आम उपभोक्ता भी बिजली कटौती से प्रभावित बताए जा रहे हैं। मयमनसिंह, बारिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना जैसे क्षेत्रों में कई जगह प्रतिदिन तीन से दस घंटे तक बिजली कटौती की बात रिपोर्ट में कही गई है। लंबे समय तक चल रही कटौती के कारण घरेलू कामकाज, व्यापारिक गतिविधियों और छोटे उद्योगों पर भी असर पड़ रहा है।
बिजली संकट के पीछे ईंधन की कमी को प्रमुख कारणों में से एक बताया जा रहा है। बांग्लादेश में बिजली उत्पादन की क्षमता होने के बावजूद कई संयंत्रों को पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा है। खासकर प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में कमी के कारण गैस आधारित बिजली संयंत्र पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में बांग्लादेश की करीब 44 प्रतिशत बिजली गैस से पैदा हुई थी, जबकि घरेलू गैस उत्पादन में लगातार कमी आने की बात कही गई है।
इस बीच बांग्लादेश में बिजली और ऊर्जा संकट को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। बांग्लादेश अवामी लीग ने सरकार पर निशाना साधते हुए ऊर्जा संकट को अर्थव्यवस्था और औद्योगिक क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया है। पार्टी की ओर से सरकार से संकट का समाधान करने की मांग की गई है। वहीं ऊर्जा विशेषज्ञ शहरयार अहमद चौधरी ने बांग्लादेश की अक्षय ऊर्जा क्षमता को लेकर कहा कि देश के कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 6 प्रतिशत है। उनके अनुसार क्षेत्र के कुछ अन्य देशों की तुलना में बांग्लादेश को सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों के विस्तार की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।
भारत से अतिरिक्त बिजली मिलने की उम्मीद भी बांग्लादेश में जताई जा रही है, लेकिन तत्काल बड़ी अतिरिक्त आपूर्ति की संभावना सीमित बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार भारत पहले से ही बांग्लादेश को 2,656 मेगावाट से अधिक बिजली उपलब्ध करा रहा है। ऐसे में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन क्षमता और घरेलू मांग का संतुलन भी महत्वपूर्ण होगा।