गरियाबंद में स्वैच्छिक विस्थापन योजना पर ग्रामीणों से संवाद, 21 सितंबर को होगी अहम बैठक
गरियाबंद जिले के ग्राम जुगाड़ में स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास योजना को लेकर जिला प्रशासन एवं उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने ग्रामीणों से संवाद किया। कलेक्टर रणवीर शर्मा और USTR उपनिदेशक वरुण जैन ने ग्रामीणों से योजना को लेकर चर्चा की। ग्रामीणों की सहमति, मुआवजा और पुनर्वास सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर अब 21 सितंबर को जिला कार्यालय में विस्तृत बैठक होगी।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद l जिले के ग्राम जुगाड़ में स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास योजना को लेकर ग्रामीणों के साथ संवाद किया गया। जिला कलेक्टर रणवीर शर्मा और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने गांव का दौरा किया और ग्रामीणों से योजना से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस दौरान वन क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के पुनर्वास, सुविधाओं और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े पहलुओं को लेकर ग्रामीणों की राय जानी गई।
स्वैच्छिक विस्थापन योजना का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को निर्धारित पुनर्वास व्यवस्था के तहत बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित एवं निर्बाध क्षेत्र विकसित करना बताया जा रहा है। वन क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों को कम करने के साथ वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण के लिए क्षेत्र को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। हालांकि, गांव के सभी ग्रामीण इस प्रक्रिया को लेकर एकमत नहीं बताए जा रहे हैं।
विस्थापन प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों की सहमति एक महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ ग्रामीण योजना के तहत विस्थापन के लिए तैयार हैं, जबकि कुछ परिवार अभी इसके पक्ष में नहीं हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि ग्रामीणों का एक हिस्सा ही विस्थापन के लिए सहमत होता है तो प्रक्रिया को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से पूरे गांव को खाली कराने की आवश्यकता को लेकर भी चर्चा जारी है।
ग्रामीणों की ओर से मुआवजा और पुनर्वास सुविधाओं को लेकर भी अपनी अपेक्षाएं सामने रखी गई हैं। ग्रामीणों के लिए विस्थापन केवल स्थान परिवर्तन का विषय नहीं है, बल्कि उनके घर, जमीन, रोजगार, सामाजिक जीवन और भविष्य की सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में पुनर्वास पैकेज और उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं को लेकर स्पष्ट जानकारी और संवाद प्रक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन और वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ चर्चा के दौरान योजना से संबंधित बिंदुओं को समझने और स्थानीय स्तर पर मौजूद चिंताओं को जानने का प्रयास किया। अधिकारियों के दौरे के बाद अब इस विषय पर आगे की प्रक्रिया को लेकर जिला स्तर पर बैठक आयोजित की जाएगी। 21 सितंबर को जिला कार्यालय में होने वाली बैठक में स्वैच्छिक विस्थापन योजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा प्रस्तावित है।
बैठक में ग्रामीणों की सहमति, पुनर्वास व्यवस्था, मुआवजा, परिवारों के लिए आवश्यक सुविधाएं और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों पर विचार किया जा सकता है। इस बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ग्राम जुगाड़ में स्वैच्छिक विस्थापन की प्रक्रिया किस रूप में आगे बढ़ेगी। फिलहाल एक तरफ वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित विचरण की आवश्यकता है, तो दूसरी ओर ग्रामीणों के हितों और उनकी सहमति से जुड़े सवाल भी सामने हैं। प्रशासन के लिए दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाते हुए आगे की प्रक्रिया तय करना महत्वपूर्ण होगा। 21 सितंबर की बैठक को इसी दृष्टि से अहम माना जा रहा है।