Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर विवाद, चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन पर नोएल टाटा की आपत्ति
Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने के फैसले के बाद Tata Trusts और कंपनी बोर्ड के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी। Tata Trusts ने इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाए हैं। विवाद का दूसरा प्रमुख मुद्दा Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग है, जिस पर दोनों पक्षों के रुख अलग बताए जा रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. Tata Group की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर लंबे समय से चल रहे मतभेद अब खुलकर सामने आ गए हैं। 17 सितंबर 2026 को Tata Sons के बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने का फैसला किया। इस प्रस्ताव के पक्ष में चार निदेशकों ने मतदान किया, जबकि Tata Trusts के चेयरमैन और ट्रस्ट के नामित निदेशक नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। इसके बाद Tata Trusts ने बोर्ड के फैसले की वैधता पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए इसे कानूनी रूप से अमान्य बताया।
Tata Trusts का कहना है कि Tata Sons के Articles of Association के तहत चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए Trusts के नामित निदेशकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। Trusts के मुताबिक दोनों नामित निदेशकों की मौजूदगी और प्रस्ताव के पक्ष में आवश्यक समर्थन के बिना चेयरमैन की पुनर्नियुक्ति वैध नहीं मानी जा सकती। नोएल टाटा ने बैठक में चंद्रशेखरन के एक्सटेंशन के खिलाफ मतदान किया। Trusts ने यह भी कहा कि चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद दोबारा पद लेने की इच्छा नहीं जताई थी और Trusts ने उस निर्णय को स्वीकार कर लिया था।
विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना था। इसके बाद Tata Sons की ओर से उनके दोबारा पद पर बने रहने के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। कंपनी के बोर्ड की नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने सितंबर की शुरुआत में चंद्रशेखरन से अपने पहले के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा था। इसके बाद बोर्ड ने पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी दी।
इस पूरे विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग है। Tata Sons को भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय ढांचे के तहत अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया है। कंपनी ने इस ढांचे से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया था, लेकिन RBI ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद Tata Sons के लिए लिस्टिंग से जुड़े नियामकीय विकल्पों पर चर्चा तेज हो गई है। Reuters के अनुसार, बोर्ड ने RBI के नियमों के अनुरूप सार्वजनिक लिस्टिंग की दिशा में कदम बढ़ाने का फैसला किया है।
लिस्टिंग को लेकर Tata Trusts और Tata Sons के रुख में भी अंतर सामने आया है। Tata Trusts ने कहा है कि उसने Tata Sons की लिस्टिंग को मंजूरी नहीं दी है और कंपनी को सभी उपलब्ध विकल्पों पर विचार करना चाहिए। दूसरी ओर, बोर्ड ने नियामकीय जरूरतों को देखते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
Tata Sons में Tata Trusts की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji Group करीब 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरा बड़ा शेयरधारक है। ऐसे में चेयरमैन के कार्यकाल और संभावित लिस्टिंग को लेकर सामने आया मतभेद कंपनी के शासन, शेयरधारकों की भूमिका और भविष्य की रणनीति से जुड़ा अहम मामला बन गया है। फिलहाल चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल और बोर्ड के अन्य फैसलों को लेकर Tata Sons तथा Tata Trusts के बीच मतभेद जारी हैं।