पहला हादसा मेहसाणा जिले के ऊंझा हाईवे पर हुआ, जहां एक तेज रफ्तार ईको कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। इस हादसे में कार सवार एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं कार चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन की गति काफी अधिक थी, जिससे चालक नियंत्रण खो बैठा और यह हादसा हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
दूसरा हादसा वलसाड जिले के कपराड़ा तालुका स्थित कुंभघाट के पहाड़ी मार्ग पर हुआ, जहां एक तेज रफ्तार ट्रक ने कार को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद कार अनियंत्रित होकर आगे खड़े एक अन्य ट्रक से जा भिड़ी। इस भीषण दुर्घटना में सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
कुंभघाट का पहाड़ी इलाका पहले से ही जोखिम भरा माना जाता है, जहां संकरे रास्ते और तीखे मोड़ हादसों की आशंका को बढ़ाते हैं। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय ट्रक की गति काफी तेज थी और चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिससे यह दुर्घटना हुई।
दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और मृतकों की पहचान की जा रही है। हादसे के बाद परिजनों में मातम का माहौल है।
इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज रफ्तार, लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी ऐसे हादसों के प्रमुख कारण हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय सावधानी बरतें, गति सीमाओं का पालन करें और पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सतर्कता रखें। थोड़ी सी लापरवाही न केवल अपनी, बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में डाल सकती है।
गुजरात के इन दो दर्दनाक हादसों ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है और एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सड़क पर सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।