9 सरकारी बैंकों के मर्जर का दावा फर्जी, PIB Fact Check ने किया खंडन
सोशल मीडिया पर 9 पब्लिक सेक्टर बैंकों को SBI, PNB और बैंक ऑफ बड़ौदा में मिलाने का दावा करने वाला एक कथित सरकारी दस्तावेज वायरल हुआ। PIB Fact Check के मुताबिक यह दस्तावेज वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन नहीं है। लोगों से अपील की गई है कि बैंकिंग और सरकारी फैसलों से जुड़ी वायरल सूचनाओं को आधिकारिक स्रोतों से सत्यापित करने के बाद ही भरोसा करें।
UNITED NEWS OF ASIA. सोशल मीडिया पर पब्लिक सेक्टर बैंकों के कथित विलय से जुड़ा एक दस्तावेज तेजी से वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि केंद्र सरकार ने 9 सरकारी बैंकों को तीन बड़े बैंकों में मिलाने का फैसला किया है। वायरल दस्तावेज में इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मिलाने, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को पंजाब नेशनल बैंक में शामिल करने तथा केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मिलाने का दावा किया गया था। हालांकि PIB Fact Check के मुताबिक यह दावा फर्जी है और वायरल दस्तावेज वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना नहीं है।
वायरल दस्तावेज को कथित तौर पर वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से जारी असाधारण राजपत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया था। इसमें 15 सितंबर 2026 की तारीख, फाइल नंबर और G.S.R. संख्या जैसी जानकारियां दर्ज थीं, जिससे इसे आधिकारिक सरकारी दस्तावेज जैसा दिखाने का प्रयास किया गया। दस्तावेज में “Amalgamation of Public Sector Banks Scheme, 2026” के नाम से बैंकों के विलय का दावा किया गया था। हालांकि PIB Fact Check की ओर से इसे सरकारी अधिसूचना नहीं माना गया है।
वायरल दावे में कहा गया था कि तीन अलग-अलग समूहों में नौ बैंकों का विलय कर तीन बड़े बैंक बनाए जाएंगे। पहले समूह में इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को SBI के साथ जोड़ने की बात कही गई थी। दूसरे समूह में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक को PNB में मिलाने का दावा था। तीसरे समूह में केनरा बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा में मिलाने की बात कही गई थी। वायरल दस्तावेज में परिसंपत्तियों, देनदारियों, अधिकारों और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण के साथ कर्मचारियों और ग्राहकों की बैंकिंग व्यवस्था को जारी रखने का भी दावा किया गया था।
PIB Fact Check का कहना है कि सरकार से संबंधित वायरल सूचनाओं की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से की जानी चाहिए। PIB का Fact Check Unit केंद्र सरकार, उसके मंत्रालयों, विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं से संबंधित दावों की जांच करता है। इसकी आधिकारिक जानकारी के अनुसार जांच के दौरान सरकारी वेबसाइटों, आधिकारिक दस्तावेजों, नोटिस, सर्कुलर और संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी का इस्तेमाल किया जाता है।
गौरतलब है कि भारत में पहले पब्लिक सेक्टर बैंकों का विलय हो चुका है। सरकार ने वर्ष 2019 और 2020 में कई बड़े बैंक विलय लागू किए थे। इनमें विजया बैंक और देना बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया का पंजाब नेशनल बैंक में विलय, सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में विलय, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय तथा इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय शामिल था।
इस पुराने बैंक विलय के वास्तविक घटनाक्रम को आधार बनाकर नए कथित दस्तावेज को विश्वसनीय दिखाने की कोशिश की गई हो सकती है, लेकिन वायरल 9 बैंकों के नए विलय संबंधी दावे को PIB Fact Check ने आधिकारिक सरकारी निर्णय नहीं माना है। ऐसे में बैंक खाताधारकों और ग्राहकों के लिए किसी वायरल पोस्ट के आधार पर बैंकिंग संबंधी निर्णय लेने के बजाय आधिकारिक सरकारी और संबंधित बैंक के स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करना जरूरी है।