Brent Crude Near $100: अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी तेल की टेंशन, भारत पर पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। 2 सितंबर को Brent Crude करीब 95.4 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 90.66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। अगर संघर्ष लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित होती है तो ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का खतरा बढ़ सकता है।

Sep 2, 2026 - 12:30
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Brent Crude Near $100: अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी तेल की टेंशन, भारत पर पड़ेगा महंगे क्रूड का असर

UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव ने वैश्विक कच्चे तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच ताजा सैन्य गतिविधियों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। 2 सितंबर को Brent Crude करीब 95.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI Crude करीब 90.66 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड का यह स्तर करीब छह सप्ताह के ऊंचे स्तर के आसपास है। बाजार में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो क्या Brent Crude फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव प्रमुख वजहों में शामिल है। ताजा सैन्य हमलों के बाद निवेशकों की चिंता इस बात को लेकर बढ़ी है कि संघर्ष का असर तेल की सप्लाई और समुद्री परिवहन पर पड़ सकता है। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी हमलों में ईरान की एयर डिफेंस, रडार और समुद्री गतिविधियों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके जवाब में ईरान की ओर से भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह दुनिया के प्रमुख समुद्री तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और वैश्विक समुद्री तेल कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है। ऐसे में अगर यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है या सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी आशंका के चलते क्रूड की कीमतों में Risk Premium बढ़ रहा है।

भारत के लिए महंगे कच्चे तेल की चिंता इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। तेल खरीदने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है, जिससे व्यापार और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

महंगे क्रूड का असर केवल तेल कंपनियों या आयात बिल तक सीमित नहीं रहता। ईंधन की लागत बढ़ने पर परिवहन और माल ढुलाई की लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसका असर सामान की सप्लाई और विभिन्न क्षेत्रों की लागत पर पड़ सकता है। लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमत ऊंची रहने पर महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना भी रहती है।

हालांकि आने वाले दिनों में तेल की दिशा काफी हद तक अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है और तेल की आपूर्ति सामान्य बनी रहती है तो कीमतों में राहत आ सकती है। लेकिन अगर संघर्ष लंबा चलता है और सप्लाई में वास्तविक बाधा आती है, तो Brent Crude के 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करने की आशंका फिर मजबूत हो सकती है। ऐसे में भारत समेत दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगा तेल एक बड़ी चुनौती बन सकता है।