लोक भवन को हरित और टिकाऊ सरकारी परिसर के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार काम किया गया है। परिसर की योजना, बुनियादी ढांचे और दैनिक संचालन में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इस उपलब्धि को सतत शासन और जलवायु अनुकूल सार्वजनिक संस्थानों की दिशा में ओडिशा की प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है।
लोक भवन परिसर की सबसे खास विशेषताओं में इसका हरित क्षेत्र शामिल है। परिसर के 80 प्रतिशत से अधिक हिस्से में हरित परिदृश्य मौजूद है। यहां 72 प्रजातियों के कुल 2,374 पेड़ दर्ज किए गए हैं। वैज्ञानिक जैव विविधता आकलन में परिसर में जीव-जंतुओं की 27 प्रजातियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। व्यापक वृक्ष आवरण और परावर्तक छतें परिसर में गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करती हैं।
जल संरक्षण के क्षेत्र में भी लोक भवन में कई प्रभावी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। जल-कुशल उपकरणों के इस्तेमाल से पेयजल की खपत में 35 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की गई है। परिसर में वर्षा जल संचयन के लिए रिचार्ज ट्रेंच, तालाब, फिल्टर चैंबर और डीप बोरवेल रिचार्ज सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। इससे भूजल पुनर्भरण और भविष्य की जल सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलती है। स्थानीय और सूखा सहन करने वाले पौधों का उपयोग भी सिंचाई की आवश्यकता को कम करने में सहायक है।
ऊर्जा दक्षता के मामले में लोक भवन ने 50.57 kWh प्रति वर्ग मीटर प्रति वर्ष का Energy Performance Index हासिल किया है। परिसर में छतों और ग्राउंड-माउंटेड स्थानों पर 635 kWp क्षमता का सौर फोटोवोल्टिक सिस्टम स्थापित किया गया है। LED लाइटिंग और स्मार्ट टाइमर आधारित नियंत्रण प्रणाली के माध्यम से बिजली की खपत को कम करने का प्रयास किया गया है।
परिसर में स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने के लिए छायादार पैदल मार्ग और इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था की गई है। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया गया है। इससे परिसर में कम उत्सर्जन वाले परिवहन को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।
अपशिष्ट प्रबंधन के लिए लोक भवन में गीले, सूखे, सैनिटरी और खतरनाक कचरे को स्रोत स्तर पर अलग किया जाता है। जैविक कचरे का परिसर में ही वर्मी-कम्पोस्टिंग के माध्यम से उपचार किया जाता है और तैयार सामग्री का उपयोग लैंडस्केपिंग, किचन गार्डन तथा मेडिसिनल गार्डन में किया जाता है। सूखे कचरे को अधिकृत रीसाइक्लिंग प्रणालियों तक भेजा जाता है, जिससे लैंडफिल में जाने वाले सूखे कचरे का 100 प्रतिशत डायवर्जन हासिल किया गया है।
स्वास्थ्य और समावेशी बुनियादी ढांचे पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। लोक भवन परिसर को No Smoking Zone घोषित किया गया है। बेहतर वेंटिलेशन और इनडोर एयर क्वालिटी से जुड़े उपायों के साथ रैंप, सुलभ शौचालय, ब्रेल सुविधा वाले लिफ्ट, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पार्किंग तथा सुविधाजनक पैदल मार्ग उपलब्ध कराए गए हैं।
लोक भवन, ओडिशा की यह उपलब्धि हरित बुनियादी ढांचे, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार शासन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में सामने आई है। 88 अंकों के साथ प्राप्त IGBC Platinum Green Campus Certification से परिसर की सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को नई पहचान मिली हैl