अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी सेना ने लारक द्वीप पर दो ईरानी रॉकेट लॉन्चर को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान की ओर से जॉर्डन और यूएई पर हमले किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस घटनाक्रम से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने की आशंका है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र खारग द्वीप पर हमले की चेतावनी भी दी गई है। खारग द्वीप ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है। ऐसे में वहां किसी सैन्य कार्रवाई की स्थिति में वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में किसी बड़े सैन्य संघर्ष की स्थिति में तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशकों के बीच सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने के बावजूद 1 सितंबर को भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। देश के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
नई दिल्ली में 1 सितंबर को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल का भाव 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।
गुड़गांव में पेट्रोल की कीमत 102.97 रुपये और डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर है, जबकि नोएडा में पेट्रोल 101.96 रुपये और डीजल 95.44 रुपये प्रति लीटर के भाव पर है। अलग-अलग राज्यों में टैक्स और स्थानीय शुल्क के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती है और लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन की कीमत केवल कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करती। रुपये और डॉलर की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स तथा तेल कंपनियों की लागत जैसे कई कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर बनी हुई है। यदि तनाव और बढ़ता है तथा तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। ऐसी स्थिति में भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर बढ़ोतरी का दबाव बन सकता है।