ग्रामीणों के अनुसार फिश पार्लर का निर्माण शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय उभेगांव के ग्राउंड में किया जा रहा है। इस स्थान पर निर्माण के लिए स्कूल प्रबंधन से आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अनुमति ली गई है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए और यदि अनुमति नहीं ली गई तो स्कूल परिसर में निर्माण की स्वीकृति किस आधार पर दी गई, इसकी जांच होनी चाहिए। स्कूल परिसर में फिश पार्लर के निर्माण से साफ-सफाई, दुर्गंध, अपशिष्ट निस्तारण और विद्यार्थियों के वातावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है।
निर्माण से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल ढांचे की स्थिति को लेकर सामने आया है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब सात फीट ऊंची स्कूल बाउंड्रीवाल के ऊपर अथवा उससे सटाकर फिश पार्लर का ढांचा खड़ा किया गया है। इसे लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि स्कूल की सुरक्षा के लिए बनाई गई बाउंड्रीवाल क्या किसी भवन का भार उठाने के लिए डिजाइन की गई थी। निर्माण शुरू करने से पहले बाउंड्रीवाल की संरचनात्मक क्षमता की जांच हुई या नहीं और वर्तमान ढांचा स्वीकृत तकनीकी नक्शे के अनुसार तैयार किया गया है या नहीं, इसकी जांच की मांग की जा रही है।
निर्माण को लेकर ग्रामीणों के बीच कथित कमीशनखोरी और स्वीकृत डिजाइन में बदलाव से जुड़े आरोपों की भी चर्चा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण की गुणवत्ता और संरचना की मजबूती का निष्पक्ष परीक्षण जरूरी है। उनका कहना है कि जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मौके पर तकनीकी निरीक्षण कर वास्तविक निर्माण का स्वीकृत नक्शे और तकनीकी मापदंडों से मिलान किया जाना चाहिए।
मामले में जनपद पंचायत छिंदवाड़ा के सब इंजीनियर राजू भूमरकर की तकनीकी भूमिका पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत उभेगांव है, लेकिन तकनीकी निगरानी से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। वहीं जनपद पंचायत छिंदवाड़ा के एसडीओ राजेन्द्र सोनी द्वारा पहले ग्राम पंचायत से जानकारी लेकर नोटिस जारी करने की बात कही गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी मौके पर ठोस तकनीकी जांच और कार्रवाई सामने नहीं आई है।
ग्राम पंचायत उभेगांव के पंच एवं निर्माण एवं विकास समिति के सदस्य पंचम अमरोदे ने मामले को लेकर जनपद पंचायत छिंदवाड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जिला पंचायत छिंदवाड़ा को पत्र लिखा है। उन्होंने फिश पार्लर निर्माण की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि निर्माण में तकनीकी या प्रशासनिक अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
पत्र के माध्यम से तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति, स्थल चयन, स्कूल से अनुमति, पुराने सुलभ शौचालय को हटाने की अनुमति, पुरानी दीवार या सामग्री के उपयोग, स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण की स्थिति की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि जांच होती है तो फिश पार्लर निर्माण की वैधता, गुणवत्ता और तकनीकी मजबूती को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।