नेपाल बाढ़ में 919 मौतों के बीच चीन पर गंभीर आरोप, ग्लेशियर और नदी डेटा समय पर नहीं देने का दावा
नेपाल-तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ के बाद नेपाल ने चीन पर ग्लेशियर, नदी जलस्तर और मौसम से जुड़ी जरूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है। नेपाल के अनुसार बाढ़ में 919 लोगों की मौत हुई है और 7000 से ज्यादा लोग लापता हैं। चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने भारी बारिश और भूस्खलन को लेकर समय पर चेतावनी जारी की थी। इस बीच नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई भीषण बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आए तेज बहाव और ग्लेशियर टूटने के बाद बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। सामने आई जानकारी के अनुसार नेपाल और तिब्बत में अब तक 919 लोगों की मौत हुई है, जिनमें अकेले नेपाल में 903 और तिब्बत में 16 लोगों की मौत बताई गई है। इसके अलावा 7000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। हजारों परिवार अब भी अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं।
इस प्राकृतिक आपदा के बीच नेपाल ने चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेपाल का कहना है कि उसने चीन से ग्लेशियरों की गतिविधियों, नदियों के जलस्तर और भारी बारिश से संबंधित जरूरी आंकड़े मांगे थे, ताकि संभावित खतरे को देखते हुए समय रहते तैयारी की जा सके। नेपाल के मुताबिक चीन की ओर से पर्याप्त और लगातार जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। नेपाल का कहना है कि केवल भारी बारिश का पूर्वानुमान पर्याप्त नहीं है और ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन तथा नदी के जलस्तर की नियमित जानकारी आपदा प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब मई में काठमांडू में नेपाल और चीन के अधिकारियों के बीच प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को लेकर बैठक हुई थी। इसके करीब तीन महीने बाद 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद दोनों देशों के बीच आपदा संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान को लेकर सवाल उठने लगे।
नेपाल अब चीन के साथ भारत की तरह एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसके तहत नदियों और मौसम से जुड़े आंकड़े नियमित रूप से साझा किए जा सकें। नेपाल का मानना है कि रियल टाइम और लगातार मिलने वाला डेटा बाढ़ जैसे खतरों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि चीन ने नेपाल के आरोपों को खारिज किया है। चीन के दूतावास के अनुसार सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र बेहद दुर्गम है और वहां लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। चीन का दावा है कि उसके मौसम केंद्र ने बाढ़ की घटना से करीब 12 दिन पहले नेपाल को ईमेल के जरिए भारी बारिश और भूस्खलन की संभावित स्थिति को लेकर अलर्ट भेजा था।
इस बीच नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार 9,435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। राहत अभियान के लिए सैकड़ों हवाई उड़ानें संचालित की गई हैं। सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े इलाकों में फंसे लोगों को भी सुरक्षित निकाला गया है। नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र बल के हजारों जवान राहत एवं बचाव अभियान में जुटे हुए हैं।
बाढ़ के बाद कई अज्ञात शव भी बरामद हुए हैं, जिनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है। लंबे समय तक पानी में रहने के कारण शवों की पहचान प्रभावित हुई है और ऐसे शवों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
वहीं नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बनी बैरियर झील का पानी प्राकृतिक रूप से निकल चुका है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार झील का अधिकांश पानी बाहर निकल गया है, जिससे डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में अचानक झील फटने से बाढ़ आने का खतरा फिलहाल कम हो गया है। इसके बावजूद नेपाल में राहत और पुनर्वास का काम बड़ी चुनौती बना हुआ है।