RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के पहले ISKCON मंदिर से दिया संदेश, बोले- कृष्ण चेतना से मिल सकती है शांति

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क स्थित ऐतिहासिक ISKCON मंदिर में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ते वैश्विक संघर्षों के बीच कृष्ण चेतना मानवता को एकजुट करने का आधार बन सकती है। ISKCON की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने प्रार्थना और आरती में भाग लिया तथा सनातन धर्म के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। हालांकि, उनके मैडिसन स्क्वायर गार्डन कार्यक्रम को लेकर कुछ संगठनों ने विरोध भी जताया है।

Aug 29, 2026 - 11:10
 0  2
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के पहले ISKCON मंदिर से दिया संदेश, बोले- कृष्ण चेतना से मिल सकती है शांति

UNITED NEWS OF ASIA. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अमेरिका यात्रा के दौरान न्यूयॉर्क स्थित ऐतिहासिक ISKCON मंदिर का दौरा किया। ISKCON की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज दुनिया में बढ़ते संघर्ष, टकराव और आपसी मतभेदों के बीच कृष्ण चेतना मानवता को जोड़ने का आधार बन सकती है। उन्होंने लोगों से कृष्ण चेतना को समझने और जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

मोहन भागवत न्यूयॉर्क के 26 सेकंड एवेन्यू स्थित उस ऐतिहासिक स्थान पर पहुंचे, जहां स्वामी प्रभुपाद ने दुनिया का पहला ISKCON मंदिर स्थापित किया था। इस स्थान का ISKCON के इतिहास में विशेष महत्व माना जाता है। अपनी यात्रा के दौरान भागवत ने मंदिर में भगवान की आरती और प्रार्थना में भी हिस्सा लिया।

ISKCON की 60वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि दुनिया में अलग-अलग पहचान, विचारधाराओं और मतभेदों के कारण तनाव बढ़ रहा है। ऐसे समय में कृष्ण चेतना लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बन सकती है। उन्होंने मानवता के बीच एकता और आपसी सद्भाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कृष्ण चेतना केवल किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता को एक साथ जोड़ने वाली व्यापक भावना के रूप में इसे देखा जा सकता है। उनके संबोधन में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और शांति का संदेश प्रमुख रहा।

इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमिशन के सदस्य और गोवर्धन इकोविलेज के निदेशक गौरांग दास के अनुसार, मोहन भागवत ने ISKCON को सनातन धर्म और हिंदू धर्म के कल्याणकारी संदेश को दुनिया के हर परिवार तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने संगठन की वैश्विक भूमिका और उसके आध्यात्मिक संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में भी अपनी बात रखी।

मोहन भागवत की न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान मैडिसन स्क्वायर गार्डन में प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर विरोध भी सामने आया है। अमेरिका के कुछ हिंदू संगठनों के साथ 61 इंटरफेथ और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने कार्यक्रम के विरोध में खुला पत्र जारी किया है। इसको लेकर अमेरिका में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा भी देखने को मिल रही है।

हालांकि न्यूयॉर्क के ऐतिहासिक ISKCON केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने मुख्य रूप से आध्यात्मिक चेतना, मानव एकता और शांति पर जोर दिया। उन्होंने कृष्ण चेतना को वर्तमान समय में दुनिया को जोड़ने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया। ISKCON की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर उनका यह संबोधन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संदेश के रूप में सामने आया।