धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा को बेहद दुखद और हृदयविदारक बताते हुए कहा कि भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों के घर तबाह हुए हैं और लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ईश्वर से सभी प्रभावित लोगों को इस कठिन समय का सामना करने की शक्ति देने और उनकी रक्षा करने की प्रार्थना की।
उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं। ऐसे कठिन समय में एक-दूसरे के साथ खड़ा होना मानवीय संवेदना और आपसी सहयोग की भावना को दर्शाता है। इसी भावना के साथ उन्होंने बागेश्वर धाम परिवार की ओर से नेपाल के प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सेवा कार्य शुरू करने की बात कही।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नेपाल स्थित बागेश्वर धाम मंडल से तत्काल राहत और सेवा कार्यों में जुटने की अपील की। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने, भोजन उपलब्ध कराने और आवश्यक चिकित्सा सहायता देने के लिए प्रयास करने की बात कही। इसके साथ ही बागेश्वर धाम के गढ़ा स्थित मुख्य धाम से भी सेवादारों और सदस्यों की विशेष टीम नेपाल भेजने की घोषणा की गई।
प्रस्तावित टीम के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं सेवा कार्यों में सहयोग किया जाएगा। जरूरतमंद लोगों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने के साथ मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। इस पहल का उद्देश्य आपदा से प्रभावित लोगों को तत्काल मानवीय सहायता उपलब्ध कराना और राहत कार्यों में यथासंभव सहयोग देना है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संदेश में कहा कि इस कठिन परिस्थिति में नेपाल के लोगों को अकेला महसूस नहीं करना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत और बागेश्वर धाम परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पीड़ितों की मदद के लिए आगे रहेगा। उन्होंने लोगों से भी आपदा प्रभावित नेपाल के नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील की।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पन्न परिस्थितियों के बीच राहत और बचाव अभियान जारी है। ऐसे समय में विभिन्न स्तरों से मिल रही मानवीय सहायता प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। बागेश्वर धाम की ओर से राहत सामग्री और मेडिकल टीम भेजने की घोषणा को भी इसी मानवीय सहयोग की पहल के रूप में देखा जा रहा है।