नेपाल में महाप्रलय: फ्लैश फ्लड से भारी तबाही, 165 मौतों की पुष्टि, 1000 से अधिक लोग लापता
चीन के तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है। पुलिस बुलेटिन के अनुसार 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 1000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 130 से अधिक भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाढ़ के तेज बहाव में घर, सड़कें, पुल और हाइड्रोपावर परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। चितवन समेत कई इलाकों में नदियों से शव बरामद किए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
UNITED NEWS OF ASIA. नेपाल में चीन के तिब्बत क्षेत्र से आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। प्राकृतिक आपदा के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक अब तक 165 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1000 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 130 से अधिक भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ के तेज बहाव ने कई घरों, सड़कों, पुलों और हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
नेपाल पुलिस के बुलेटिन के अनुसार गुरुवार सुबह तक आठ जिलों में 165 शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ का बहाव इतना शक्तिशाली था कि मलबे और लोगों को घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर तक बहाकर ले गया। चितवन क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। त्रिशूली और नारायणी नदियों से मिले शवों को भरतपुर अस्पताल के शवगृह में रखा गया है। अधिकारियों द्वारा मृतकों और लापता लोगों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
नेपाल टूरिस्ट बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। भारत के 130 से अधिक लोगों के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के नागरिक भी लापता बताए गए हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र तीर्थयात्रियों और ट्रेकर्स के बीच लोकप्रिय होने के कारण विदेशी पर्यटकों की मौजूदगी काफी अधिक थी। भारत से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के कई पर्यटकों के लापता होने की खबर है।
प्राकृतिक आपदा के कारण नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक 19 पुल, करीब 40 किलोमीटर सड़कें और 13 हाइड्रोपावर परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त या तबाह हो गई हैं। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट जाने से राहत और बचाव टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार चीन की तरफ ल्हेंदे नदी क्षेत्र में पहाड़ का बड़ा हिस्सा खिसकने की घटना हुई थी। इस लैंडस्लाइड से इतना शक्तिशाली कंपन पैदा हुआ कि उसे 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा महसूस किया गया। हालांकि इसे वास्तविक भूकंप नहीं बताया गया है। माना जा रहा है कि पहाड़ से खिसका मलबा और पानी ल्हेंदे नदी के रास्ते भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों तक पहुंचा, जिसके बाद बाढ़ का बहाव बेहद तेज हो गया।
बाढ़ का असर नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी देखने को मिला है। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार तिब्बत में भी लोगों के हताहत होने और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। सीमा क्षेत्र में पानी और मलबे का तेज बहाव कई इमारतों और अन्य संरचनाओं से टकराता दिखाई दिया।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने और लापता नागरिकों की तलाश में जुटा है। लगातार सामने आ रही नई जानकारी के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है।