आदिवासी हितों और अधिकारों पर कांग्रेस की बैठक, विश्व आदिवासी दिवस को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

रायपुर के राजीव भवन में आदिवासी कांग्रेस कार्यकारिणी समिति और आदिवासी सलाहकार परिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में वन अधिकार अधिनियम, पेसा कानून, वनाधिकार पट्टे और जल, जंगल, जमीन से जुड़े आदिवासी अधिकारों पर चर्चा की गई। कांग्रेस ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की रूपरेखा पर भी विचार किया। विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य सरकार की ओर से आयोजन नहीं किए जाने को लेकर निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।

Aug 27, 2026 - 08:22
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आदिवासी हितों और अधिकारों पर कांग्रेस की बैठक, विश्व आदिवासी दिवस को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राजधानी स्थित राजीव भवन में आदिवासी कांग्रेस कार्यकारिणी समिति एवं आदिवासी सलाहकार परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया का स्वागत किया गया। इस दौरान आदिवासी समाज से जुड़े अधिकारों, संगठनात्मक विषयों और प्रदेश में आदिवासी हितों से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून के अनुपालन की स्थिति की जानकारी ली गई। इसके साथ ही वनाधिकार पट्टों, जल, जंगल और जमीन पर आदिवासी समाज के अधिकारों तथा संसाधनों के दोहन से उत्पन्न पर्यावरणीय चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ। कांग्रेस नेताओं ने आदिवासी समाज के अधिकारों और हितों से जुड़े विषयों को मजबूती से उठाने तथा संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया।

बैठक में आदिवासी समाज के सामने मौजूद विभिन्न चुनौतियों पर चर्चा के साथ संगठन की आगामी गतिविधियों और आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर भी विचार किया गया। कांग्रेस ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकार, सम्मान और हितों की रक्षा संगठन की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। नेताओं ने आदिवासी क्षेत्रों में जनसमस्याओं को समझने और उनकी आवाज को प्रभावी तरीके से उठाने की आवश्यकता बताई।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बैठक में विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्य सरकार की ओर से आयोजन नहीं किए जाने को लेकर निंदा प्रस्ताव रखा। कांग्रेस के अनुसार यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्य सरकार की ओर से कोई बड़ा आयोजन नहीं किया गया और मुख्यमंत्री सहित सत्तारूढ़ दल के मंत्रियों, विधायकों तथा नेताओं ने आदिवासी समाज को बधाई देने की औपचारिकता भी नहीं निभाई।

कांग्रेस ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, संस्कृति और गौरव से जुड़ा अवसर है। पार्टी का कहना है कि यह दिवस दुनिया के सामने आदिवासी समाज की एकता, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करने का अवसर देता है।

बैठक में कांग्रेस नेताओं ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों से दूर करने की कोशिश की जा रही है और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से आदिवासी समुदाय प्रभावित हो रहा है। पार्टी ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और स्वतंत्र पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम और पेसा कानून जैसे प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन आदिवासी समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। वनाधिकार पट्टों से जुड़े मामलों का समय पर निराकरण और ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूत करना भी जरूरी है। बैठक में इन विषयों को लेकर संगठन स्तर पर लगातार आवाज उठाने का निर्णय लिया गया।

बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, आदिवासी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव, शिवकुमार डहरिया, अमरजीत भगत सहित विधायक, पूर्व विधायक, पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

कांग्रेस ने कहा कि आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर संगठन आगे भी सक्रिय भूमिका निभाएगा। बैठक में तय किया गया कि आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूती से उठाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर व्यापक आंदोलन की दिशा में भी कदम बढ़ाए जाएंगे।