भारत कोई धर्मशाला नहीं, घुसपैठियों को देश से बाहर करने के लिए सख्त कार्रवाई होगी: अमित शाह
नई दिल्ली में आयोजित नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ को देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और सरकार का लक्ष्य देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है। शाह ने आतंकवाद के खिलाफ PRAHAR रणनीति लागू करने, सीमावर्ती राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने और नए आपराधिक कानूनों को एक साल में पूरी तरह लागू करने पर भी जोर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली में आयोजित इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस 2026 के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार उसके नागरिकों का है। शाह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है। उन्होंने घुसपैठ को केवल सीमा सुरक्षा से जुड़ी चुनौती नहीं बल्कि देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन से जुड़ा गंभीर विषय बताया।
दो दिवसीय नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस के अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहना होगा। उन्होंने राज्यों से घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया। शाह के मुताबिक, केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर सीमा सुरक्षा के लिए व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों के दौरान उन्होंने सभी सीमावर्ती राज्यों का दौरा किया और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राज्यों के साथ चर्चा की है।
अमित शाह ने आतंकवाद के खिलाफ भी व्यापक रणनीति अपनाने की बात कही। उन्होंने आतंकवाद के 360 डिग्री नेटवर्क को खत्म करने के लिए PRAHAR रणनीति को रोजमर्रा की कार्रवाई में लागू करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल आतंकियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसके पूरे नेटवर्क, सहयोगी तंत्र और वित्तीय एवं अन्य संसाधनों पर भी प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
गृह मंत्री ने कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने लंबे समय से मौजूद नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद जैसी प्रमुख चुनौतियों पर सरकार ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। उन्होंने इसका श्रेय राज्यों की पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समन्वित प्रयासों को दिया। शाह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल आगे भी जरूरी रहेगा।
कॉन्फ्रेंस के दौरान नए आपराधिक कानूनों को लेकर भी महत्वपूर्ण लक्ष्य सामने रखा गया। अमित शाह ने कहा कि अगले एक साल में तीनों नए आपराधिक कानूनों को पूरी तरह लागू करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से आपराधिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और न्याय व्यवस्था में सुधार आएगा।
अमित शाह ने खुफिया तंत्र को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज फोरम को अगले 15 से 20 वर्षों की संभावित सुरक्षा चुनौतियों का अनुमान लगाकर ऐसी रणनीतियां तैयार करनी चाहिए, जिनसे खतरे बड़े संकट में बदलने से पहले ही उनसे निपटा जा सके। उन्होंने अपराध के बदलते तरीकों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर भी बल दिया। उनका कहना था कि तकनीक और बेहतर खुफिया जानकारी के माध्यम से भविष्य में सामने आने वाली सुरक्षा चुनौतियों को समय रहते रोका जा सकता है।