आंदोलन की शुरुआत रामदेव मंदिर परिसर में सभा के साथ हुई। इसके बाद ग्रामीण हाथों में तख्तियां लेकर रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान जल, जंगल, जमीन और ग्राम सभा के अधिकारों से जुड़े नारे लगाए गए। ग्रामीणों का कहना था कि उनकी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े किसी भी फैसले में ग्राम सभा की सहमति और उसके अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।
कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद ज्ञापन लेने के लिए एसडीएम और अपर कलेक्टर प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे, लेकिन आंदोलनकारियों ने उनके माध्यम से ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपनी मांगें और ग्राम सभाओं के प्रस्ताव सीधे कलेक्टर को सौंपना चाहते हैं। इसके बाद कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचीं और प्रदर्शनकारियों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी बात सुनी। इस दौरान जमीन अधिग्रहण और प्रस्तावित खनिज ब्लॉकों की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां और मांगें प्रशासन के सामने रखीं।
चर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया कि भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से संबंधित पत्र जारी किए गए हैं और इन्हीं के आधार पर ग्राम सभाओं से प्रस्ताव मांगे गए थे। इसके बाद सेमलाया, मोटाउमर और जुवारी पंचायतों की ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्ताव कलेक्टर को सौंपे गए। इन प्रस्तावों में ग्रामीणों ने जमीन नहीं देने का निर्णय व्यक्त किया है। आंदोलनकारियों ने मांग की कि ग्राम सभाओं के इन प्रस्तावों को प्रशासनिक रिकॉर्ड में शामिल कर शासन के उच्च स्तर तक भेजा जाए और ग्राम सभा के फैसले का सम्मान किया जाए।
जोबट विधायक सेना महेश पटेल ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा के अधिकारों से समझौता नहीं होना चाहिए और ग्रामीणों की सहमति के बिना उनकी जमीन से संबंधित निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से ग्राम सभाओं द्वारा लिए गए निर्णयों को शासन तक पहुंचाने की मांग की।
आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कहा कि ग्राम सभाओं में ग्रामीणों ने जमीन नहीं देने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन समाज के जीवन का आधार हैं और उनके अधिकारों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आदिवासी क्षेत्रों में जमीन और खनिज से संबंधित प्रक्रियाओं में ग्राम सभा के अधिकारों तथा पेसा कानून के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने की मांग की।
आंदोलन के दौरान किसानों ने खाद की समस्या को लेकर भी अपनी आवाज उठाई। किसानों ने टोकन व्यवस्था समाप्त करने, आधार और खसरा नकल के आधार पर जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराने तथा पर्याप्त मात्रा में खाद की व्यवस्था करने की मांग रखी। किसानों का कहना था कि खाद लेने के लिए उन्हें लंबे समय तक परेशान न होना पड़े और वितरण व्यवस्था को सरल बनाया जाए।
मंगलवार के इस प्रदर्शन में हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी से जमीन अधिग्रहण और खनिज ब्लॉक के मुद्दे पर उनका विरोध स्पष्ट नजर आया। कलेक्टर का प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचकर जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनना भी चर्चा का विषय रहा। वहीं तीन ग्राम सभाओं के जमीन नहीं देने संबंधी प्रस्ताव सौंपे जाने से ग्रामीणों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। आंदोलनकारियों ने कहा कि जल, जंगल, जमीन, किसान और ग्राम सभा के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे।