मृत किसानों के नाम पर 1.77 करोड़ का KCC ऋण घोटाला, CEO के FIR आदेश के बाद भी 19 दिन से अपराध दर्ज नहीं

महासमुंद के सरायपाली क्षेत्र की केना सेवा सहकारी समिति में करीब 1.77 करोड़ रुपये के कथित KCC ऋण फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जांच में मृत किसानों और समिति क्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर ऋण जारी करने तथा जमीन के रकबे में कथित हेरफेर की जानकारी सामने आई है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की CEO अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त 2026 को संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक अपराध दर्ज नहीं होने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

Aug 26, 2026 - 10:06
Aug 26, 2026 - 10:10
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मृत किसानों के नाम पर 1.77 करोड़ का KCC ऋण घोटाला, CEO के FIR आदेश के बाद भी 19 दिन से अपराध दर्ज नहीं

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l सरायपाली क्षेत्र की केना सेवा सहकारी समिति में किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC ऋण से जुड़ा करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपये का कथित फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद मामला गंभीर सवालों के घेरे में है। जांच के दौरान मृत किसानों के नाम पर ऋण जारी किए जाने, समिति क्षेत्र से बाहर के किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत किए जाने और किसानों की जमीन के रकबे में कथित तौर पर हेरफेर किए जाने की जानकारी सामने आई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित रायपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त 2026 को महासमुंद के नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा को संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक अपराध दर्ज नहीं होने से कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 के दौरान कुछ किसानों की जमीन के वास्तविक रकबे में कथित हेरफेर कर उसे दस्तावेजों में कई गुना अधिक दर्शाया गया। जानकारी के मुताबिक जिन किसानों के पास एक से तीन एकड़ तक जमीन थी, उनके नाम पर कागजों में 19 से 25 एकड़ तक का रकबा दिखाकर लाखों रुपये का KCC ऋण स्वीकृत किए जाने का मामला सामने आया। कुछ किसानों को इस कथित ऋण की जानकारी तब हुई जब वे स्वयं बैंक से ऋण लेने पहुंचे। कई किसानों ने जांच के दौरान बताया कि उन्होंने संबंधित ऋण के लिए आवेदन ही नहीं किया था।

मामले का एक गंभीर पहलू मृत किसानों के नाम पर ऋण जारी किए जाने से जुड़ा है। जांच में ऐसे मामलों का भी उल्लेख सामने आया है, जिससे यह सवाल उठता है कि मृत किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृति और राशि निकासी की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई। पुलिस में FIR दर्ज होने के बाद दस्तावेजों, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया, राशि निकासी और संबंधित रिकॉर्ड की विस्तृत जांच से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

जांच प्रतिवेदन में छह लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। इनमें केना समिति के तत्कालीन प्रभारी भीष्मदेव पटेल, तोरेसिंहा बैंक के तत्कालीन सुपरवाइजर श्याम सुंदर पटेल, वर्तमान सुपरवाइजर राज कुमार प्रधान, बैंक मैनेजर युवराज नायक, कनिष्ठ लिपिक हीरा सिंह ध्रुव और प्रभारी लेखापाल खिलेश्वर साहू के नाम शामिल हैं। बैंक स्तर पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई किए जाने की जानकारी है, जबकि समिति स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर की CEO अपेक्षा व्यास ने 6 अगस्त को नोडल अधिकारी को जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल FIR दर्ज कराने और उसकी छायाप्रति मुख्य कार्यालय भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 19 दिन बाद भी FIR दर्ज नहीं होने से यह सवाल उठ रहा है कि लिखित आदेश के पालन में देरी किस स्तर पर हो रही है।

इस मामले में विभागीय कार्रवाई और आपराधिक कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। करीब 1.77 करोड़ रुपये के किसान KCC ऋण से जुड़े कथित फर्जीवाड़े में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच के माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि ऋण स्वीकृति में किन दस्तावेजों का उपयोग हुआ, मृत किसानों के नाम पर ऋण कैसे जारी हुआ, राशि किस माध्यम से निकाली गई और इस पूरी प्रक्रिया में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

वहीं सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि केना समिति में इससे पहले भी किसानों के रकबे में कथित हेरफेर कर तीन करोड़ रुपये से अधिक के KCC ऋण से जुड़ा मामला सामने आ चुका है। ऐसे में वर्तमान प्रकरण में FIR में हो रही देरी ने सहकारी बैंक और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि लिखित निर्देश के बावजूद लंबित FIR पर जिम्मेदार अधिकारी कब तक कार्रवाई करते हैं और कथित ऋण फर्जीवाड़े की आपराधिक जांच कब शुरू होती है।