नेत्रदान से किसी की दुनिया में भर सकते हैं रोशनी के रंग, आज से शुरू हुआ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा

छत्तीसगढ़ में 25 अगस्त से राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े की शुरुआत हुई, जो 8 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में जागरूकता रैली, जनसंपर्क और प्रचार-प्रसार सहित विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि मृत्यु के छह घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है और एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिबाधित लोगों को दृष्टि का उपहार मिल सकता है।

Aug 26, 2026 - 10:47
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नेत्रदान से किसी की दुनिया में भर सकते हैं रोशनी के रंग, आज से शुरू हुआ राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l मृत्यु के बाद भी किसी की जिंदगी में रोशनी लौटाई जा सकती है। नेत्रदान के इसी मानवीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में 25 अगस्त से राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े की शुरुआत हो गई है। यह पखवाड़ा 8 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान प्रदेश के सभी जिलों में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। जागरूकता रैली, जनसंपर्क अभियान, प्रचार-प्रसार कार्यक्रम और लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने वाली गतिविधियों के माध्यम से समाज में नेत्रदान के महत्व का संदेश पहुंचाया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को नेत्रदान के महत्व और इसकी प्रक्रिया के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय स्वास्थ्य संस्थाओं, स्वास्थ्यकर्मियों और संबंधित संस्थाओं की सहभागिता से लोगों को नेत्रदान से जुड़ी सही और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। पखवाड़े के दौरान विभिन्न स्थानों पर जागरूकता रैलियां और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित करने की योजना भी तैयार की गई है।

राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम की राज्य कार्यक्रम अधिकारी डॉ निधि ग्वालरे ने बताया कि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को दृष्टि का उपहार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि नेत्रदान के माध्यम से मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का अवसर मिलता है और किसी की दुनिया में रोशनी लौटाई जा सकती है। इसी मानवीय भावना को अभियान का प्रमुख संदेश बनाया गया है कि आपका नेत्रदान किसी की दुनिया में रोशनी ला सकता है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मृत्यु के बाद छह घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी किया जाना आवश्यक है। इसके लिए मृत व्यक्ति के परिजन नजदीकी नेत्र बैंक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल या जिला चिकित्सालय से संपर्क कर सकते हैं। आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय टीम संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचकर भी नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कर सकती है।

यदि किसी व्यक्ति ने जीवनकाल में नेत्रदान की घोषणा नहीं की है, तब भी मृत्यु के बाद उसके परिजन नेत्रदान कर सकते हैं। चश्मा पहनने वाले तथा नेत्र का ऑपरेशन करा चुके व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं। हालांकि कुछ बीमारियों और संक्रमण की स्थिति में चिकित्सकीय जांच के आधार पर नेत्रदान की उपयुक्तता निर्धारित की जाती है।

नेत्रदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के दौरान आयोजित जागरूकता गतिविधियों में सहभागिता करें, नेत्रदान की प्रक्रिया और इससे जुड़े तथ्यों की सही जानकारी प्राप्त करें तथा परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। एक व्यक्ति का संकल्प मृत्यु के बाद भी किसी जरूरतमंद के जीवन में नई रोशनी का माध्यम बन सकता है।

प्रदेश में नेत्रदान के इच्छुक नागरिक अथवा मृत व्यक्ति के परिजन नेत्रदान से संबंधित जानकारी और प्रक्रिया के लिए संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर चिकित्सालय रायपुर से 0771-2890067, सिम्स मेडिकल कॉलेज बिलासपुर से 07752-222301 और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर से 0771-2577389 पर संपर्क किया जा सकता है।

राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान के महत्व को समझें और इस मानवीय कार्य के लिए आगे आएं। नेत्रदान का एक संकल्प किसी दृष्टिबाधित व्यक्ति के जीवन में उजाले की नई शुरुआत कर सकता है।