राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर भड़के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- हिंदू धर्मविरोधी बयानबाजी से बाज आएं

मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी के बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने राहुल गांधी पर हिंदू धर्म और सनातन परंपरा को लेकर गलत धारणा फैलाने का आरोप लगाते हुए ऐसे बयानों से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने मनुस्मृति के एक श्लोक की अलग व्याख्या करते हुए कहा कि उसमें महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक दायित्व का उल्लेख है।

Aug 25, 2026 - 14:39
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राहुल गांधी के मनुस्मृति बयान पर भड़के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, बोले- हिंदू धर्मविरोधी बयानबाजी से बाज आएं

UNITED NEWS OF ASIA. मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के बयान पर राजनीतिक और धार्मिक बहस तेज हो गई है। राहुल गांधी के बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्हें हिंदू धर्म और सनातन परंपरा के संबंध में बयानबाजी से बचने की चेतावनी दी है। शंकराचार्य ने कहा कि प्राचीन धर्मशास्त्रों और सनातन सांस्कृतिक विचारों को संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने इसे सनातन परंपरा के प्रति सतही समझ और गलत धारणा का परिणाम बताया।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गांधी के मनुस्मृति से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए प्राचीन धर्मग्रंथों के श्लोकों को संदर्भ से काटकर पेश करने से समाज में भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से मनुस्मृति में उल्लेखित ‘पिता रक्षति कौमारे, भर्ता रक्षति यौवने’ वाले श्लोक का संदर्भ दिया। उनके अनुसार इस श्लोक में ‘रक्षति’ शब्द का अर्थ सुरक्षा और संरक्षण से जुड़ा है तथा इसे महिलाओं पर नियंत्रण या परतंत्रता के अर्थ में देखना उचित नहीं है।

शंकराचार्य ने सनातन परंपरा में महिलाओं के स्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वांग्मय में नारी को केवल आश्रित के रूप में नहीं देखा गया है। उन्होंने गार्गी, मैत्रेयी और लोपामुद्रा जैसी ऋषिकाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में महिलाओं को ज्ञान और आध्यात्मिक विमर्श में महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उन्होंने ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ की मान्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि सनातन परंपरा में नारी के सम्मान पर जोर दिया गया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि राहुल गांधी का यह दावा कि भारतीय जनता पार्टी मनुस्मृति का समर्थन करती है, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में देश की शासन व्यवस्था संविधान के आधार पर संचालित होती है। उनके अनुसार किसी राजनीतिक दल को मनुस्मृति से जोड़ना राजनीतिक विमर्श का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे ऐतिहासिक और संवैधानिक वास्तविकता के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने राहुल गांधी के लगातार मनुस्मृति विरोधी बयानों पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे हिंदू धर्मशास्त्रों और सनातन जीवन-दृष्टि के प्रति उनकी नकारात्मक सोच दिखाई देती है। शंकराचार्य ने चेतावनी दी कि धार्मिक परंपराओं को लेकर बयान देते समय तथ्यों और संदर्भों का ध्यान रखा जाना चाहिए, अन्यथा इसका विरोध किया जाएगा।

दरअसल राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के पुणे में शनिवार को आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में मनुस्मृति को लेकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं को दबाने की मानसिकता मनुस्मृति से आती है और उनकी लड़ाई इसी सोच के खिलाफ है। राहुल गांधी ने BJP और RSS पर भी आरोप लगाया कि वे महिलाओं को सीमित रखने वाली मानसिकता का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि वह ऐसा भारत नहीं चाहते, जहां लड़कियां और महिलाएं पिंजरे में बंद रहें।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद मनुस्मृति और सनातन परंपरा को लेकर राजनीतिक तथा धार्मिक बहस शुरू हो गई है। एक ओर राहुल गांधी अपने बयान के जरिए महिला अधिकारों और समानता का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे हिंदू धर्म और भारतीय परंपरा की गलत व्याख्या बताया है। इस विवाद के बीच मनुस्मृति के सामाजिक और ऐतिहासिक संदर्भ को लेकर सार्वजनिक बहस भी तेज होती दिखाई दे रही है।