सिंधु जल संधि विवाद: भारत के ‘पानी के हथियार’ वाले आरोप पर अहसान इकबाल का बड़ा बयान

पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच सिंधु जल संधि और पाकिस्तान की जल सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अपनी भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल पानी को रणनीतिक हथियार के रूप में कर सकता है। साथ ही उन्होंने दक्षिण एशिया में भारत की केंद्रीय भूमिका को भी स्वीकार किया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने से दोनों देशों के बीच जल विवाद और गहरा गया है।

Aug 22, 2026 - 16:09
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सिंधु जल संधि विवाद: भारत के ‘पानी के हथियार’ वाले आरोप पर अहसान इकबाल का बड़ा बयान

UNITED NEWS OF ASIA. पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने भारत के साथ जारी तनाव के बीच सिंधु जल संधि और पाकिस्तान की जल सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत की भौगोलिक स्थिति और सिंधु नदी प्रणाली में उसकी भूमिका का उल्लेख करते हुए आशंका जताई कि नई दिल्ली भविष्य में पानी को रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। उनके बयान में पाकिस्तान की जल सुरक्षा को लेकर चिंता के साथ दक्षिण एशिया में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका की स्वीकारोक्ति भी दिखाई दी है।

अहसान इकबाल के मुताबिक पाकिस्तान के सामने यह चुनौती स्पष्ट है कि भारत से होकर पाकिस्तान की ओर आने वाली प्रमुख नदियों के जल प्रवाह पर नई दिल्ली को भौगोलिक बढ़त हासिल है। पाकिस्तान की कृषि, पेयजल व्यवस्था और अर्थव्यवस्था काफी हद तक सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। ऐसे में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में जल प्रवाह से जुड़े किसी भी फैसले का पाकिस्तान पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसी वजह से पाकिस्तान लगातार सिंधु जल संधि को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखता रहा है।

सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के पानी के इस्तेमाल से जुड़े अधिकार और व्यवस्थाएं तय की गई थीं। दशकों तक दोनों देशों के बीच कई राजनीतिक और सैन्य तनावों के बावजूद यह समझौता जल बंटवारे का महत्वपूर्ण आधार बना रहा। हालांकि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को एबेयंस में रखने का फैसला किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच जल विवाद और अधिक गंभीर हो गया।

भारत ने अपने फैसले को सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे से जोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने की स्थिति में सिंधु जल संधि को सामान्य रूप से लागू करना संभव नहीं होगा। दूसरी ओर पाकिस्तान भारत के इस कदम को एकतरफा और गैरकानूनी बताता रहा है। इस विवाद के बीच दोनों देशों के बीच पानी को लेकर रणनीतिक और राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हुई है।

अहसान इकबाल का एक अन्य बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने दक्षिण एशिया में भारत की केंद्रीय भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि क्षेत्र के प्रभावी ढंग से काम करने के लिए भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था, विशाल भूगोल और क्षेत्रीय प्रभाव के कारण दक्षिण एशिया की राजनीति और सहयोग व्यवस्था में उसकी भूमिका अहम मानी जाती है।

अहसान इकबाल के दोनों बयानों को एक साथ देखा जाए तो पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति सामने आती है। एक तरफ पाकिस्तान भारत पर जल संसाधनों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करने की आशंका जता रहा है, वहीं दूसरी ओर वह दक्षिण एशिया में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार कर रहा है। सिंधु जल संधि का विवाद अब केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भारत-पाकिस्तान संबंधों, आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों से भी जुड़ गया है।