सड़क मार्ग की कमी से अमोदा, पिपरिया और मढ़ी जमुनिया में पढ़ाई सहित आम जनजीवन बदहाल
सागर जिले के गौरझामर से करीब दो किलोमीटर दूर मढ़ी जमुनिया ग्राम पंचायत के पिपरिया टोले में सड़क की बदहाल स्थिति से ग्रामीणों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दौरान मार्ग कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे बच्चों का स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों के अनुसार आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस सेवा भी गांव तक नहीं पहुंच पाती। ग्रामीण कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब ग्रामीणों ने जल्द सड़क सुधार नहीं होने पर भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
UNITED NEWS OF ASIA. योगेश विश्वकर्मा, सागर l सागर जिले के गौरझामर क्षेत्र से करीब दो किलोमीटर दूर मढ़ी जमुनिया ग्राम पंचायत के पिपरिया टोले में सड़क मार्ग की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बरसात के दिनों में अमोदा और बेलगुआ से सालावारा पंचायत की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह रास्ता उनके आवागमन का एकमात्र प्रमुख सहारा है, लेकिन लंबे समय से इसकी स्थिति इतनी खराब है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण और मार्ग सुधार को लेकर कई बार आवेदन और मांगपत्र जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक मार्ग की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। बारिश के दौरान कीचड़ बढ़ जाने से ग्रामीणों को रोजमर्रा के काम के लिए भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। विद्यार्थियों के त्रैमासिक पेपर चल रहे हैं, लेकिन खराब रास्ते के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार बच्चे स्कूल जाने के लिए पीठ पर स्कूल बैग, हाथों में जूते और सिर पर बरसाती लेकर कीचड़ भरे रास्ते से निकलने का प्रयास करते हैं। कई बार रास्ते में फिसलकर गिरने के कारण उनके स्कूल ड्रेस गंदे हो जाते हैं और उन्हें वापस घर लौटना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम में केवल लोगों को ही नहीं, बल्कि मवेशियों को भी इस मार्ग से गुजरने में परेशानी होती है। कई बार गौवंश कीचड़ में फंस जाते हैं और उन्हें बाहर निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ मामलों में मवेशी लंबे समय तक कीचड़ में फंसे रहे, जिसके कारण उन्हें समय पर भोजन और पानी भी नहीं मिल पाया।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के बीमार होने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा भी खराब सड़क के कारण गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को मुख्य मार्ग तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को स्वयं व्यवस्था करनी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क की समस्या को लेकर ग्राम पंचायत स्तर से लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक कई बार अपनी बात रखी है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम सरपंच से भी सड़क सुधार की मांग की गई, लेकिन पहले इसे किसी अन्य विभाग से संबंधित मार्ग बताया गया। इसके बाद तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग पर पंचायत में पर्याप्त फंड नहीं होने की बात कही गई।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या अब किसी से छिपी नहीं है। आवेदन, निवेदन, सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से समस्या की जानकारी संबंधित लोगों तक पहुंचाई जा चुकी है। इसके बावजूद यदि जल्द सड़क सुधार की कार्रवाई नहीं होती है तो ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने की चेतावनी दी है।
ग्रामीणों ने कहा कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं बल्कि बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और पूरे क्षेत्र के सामान्य जनजीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उनका कहना है कि यदि समय रहते मार्ग को दुरुस्त नहीं किया गया तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां इसी तरह प्रभावित होती रहेंगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कर सड़क की स्थिति सुधारने और स्थायी समाधान की मांग की है। वहीं जल्द कार्रवाई नहीं होने पर भूख हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।