वंदे मातरम् पर सियासत तेज, अमित शाह बोले- कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के दो टुकड़े किए
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पहले दो अंतरों के गायन को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे तुष्टीकरण की राजनीति बताया और आरोप लगाया कि पार्टी ने 1937 में वंदे मातरम् को लेकर लिए गए फैसले से विभाजन की नींव रखी थी। कांग्रेस ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि उसका रुख 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप है।
UNITED NEWS OF ASIA. वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति के फैसले के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पहले दो अंतरों के गायन को लेकर रुख स्पष्ट किए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक बार फिर करीब 90 साल पुरानी गलती दोहरा रही है और वंदे मातरम् को लेकर लिया गया फैसला तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित है।
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस द्वारा वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने का निर्णय उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के दो हिस्से किए और इसी फैसले से देश के विभाजन की नींव पड़ी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी उसी निर्णय को आगे बढ़ा रही है।
गृह मंत्री ने कहा कि देश में तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी। उन्होंने लोगों से कांग्रेस के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद करने और तुष्टीकरण की राजनीति का विरोध करने की अपील की। अमित शाह ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस 1937 के अपने प्रस्ताव को मान रही है, जबकि संसद से जुड़े प्रावधानों को नजरअंदाज कर रही है।
बीजेपी ने भी कांग्रेस के फैसले को लेकर निशाना साधा है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि कांग्रेस एक बार फिर अपने पुराने निर्णय को दोहरा रही है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् देश के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत है, इसलिए इसके गायन को लेकर कांग्रेस का फैसला सवालों के घेरे में है।
वहीं कांग्रेस ने अपने रुख का बचाव किया है। पार्टी ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् को लेकर कोई भ्रम नहीं है और उसका स्टैंड पूरी तरह स्पष्ट है। कांग्रेस के अनुसार 1937 के प्रस्ताव में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल सहित तत्कालीन नेताओं द्वारा जो निर्णय लिया गया था, पार्टी उसी फैसले के साथ खड़ी है।
कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर पार्टी की वर्तमान स्थिति किसी नए निर्णय का परिणाम नहीं है, बल्कि 1937 में लिए गए निर्णय से जुड़ी है। पार्टी ने बीजेपी और केंद्र सरकार की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को राजनीतिक नजरिए से देखा है।
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच बढ़ती बयानबाजी ने इस मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर बीजेपी इसे तुष्टीकरण और राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस अपने ऐतिहासिक निर्णय और 1937 के प्रस्ताव का हवाला देकर अपने रुख को सही ठहरा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।