सुप्रीम कोर्ट को मिलेंगे तीन नए जज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कॉलेजियम की सिफारिश को दी मंजूरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को मंजूरी देते हुए जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। तीनों जज 6 अक्टूबर 2026 को शपथ लेंगे। इनके शपथ लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या 37 हो जाएगी।

Oct 5, 2026 - 20:18
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सुप्रीम कोर्ट को मिलेंगे तीन नए जज, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कॉलेजियम की सिफारिश को दी मंजूरी

UNITED NEWS OF ASIA. सुप्रीम कोर्ट में तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से भेजी गई सिफारिश को मंजूरी दे दी है। इसके तहत जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तीनों नवनियुक्त न्यायाधीश 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए तीनों न्यायाधीश अलग-अलग हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के पद पर कार्यरत रहे हैं। जस्टिस सुनीता अग्रवाल गुजरात हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश हैं, जबकि जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। वहीं जस्टिस अपरेश कुमार सिंह तेलंगाना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इन तीनों नामों की सिफारिश की थी।

इन नियुक्तियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 38 है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं। फिलहाल अदालत में 34 न्यायाधीश कार्यरत हैं। तीन नए न्यायाधीशों के शपथ लेने के बाद न्यायालय में कुल 37 न्यायाधीश हो जाएंगे। कॉलेजियम ने इन नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट की कार्यक्षमता और मजबूती के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया था।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल का लंबा न्यायिक अनुभव रहा है। वह मूल रूप से इलाहाबाद हाई कोर्ट की जज रही हैं। उन्होंने 1989 में अवध विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की और दिसंबर 1990 में वकालत शुरू की। नवंबर 2011 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2013 में वह स्थायी न्यायाधीश बनीं। जुलाई 2023 में उन्होंने गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। सुप्रीम कोर्ट में उनकी नियुक्ति के बाद शीर्ष अदालत में महिला न्यायाधीशों की संख्या तीन हो जाएगी। वह अप्रैल 2031 में सेवानिवृत्त होंगी।

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और मई 1991 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। मई 2007 से नवंबर 2011 तक वह उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता रहे। नवंबर 2011 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और अगस्त 2013 में वह स्थायी न्यायाधीश बने। जुलाई 2023 में उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला। जनवरी 2025 में उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में हुआ।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 1990 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया। उन्होंने पटना हाई कोर्ट और बाद में झारखंड हाई कोर्ट में वकालत की। जनवरी 2012 में उन्हें झारखंड हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और जनवरी 2014 में स्थायी न्यायाधीश बने। उन्होंने दिसंबर 2022 से फरवरी 2023 तक झारखंड हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी कार्य किया। अप्रैल 2023 में उन्हें त्रिपुरा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। जुलाई 2025 में उनका तबादला तेलंगाना हाई कोर्ट हुआ, जहां उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

तीनों न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट को व्यापक न्यायिक अनुभव वाले तीन नए सदस्य मिलेंगे। इन नियुक्तियों से शीर्ष अदालत में लंबित मामलों के निस्तारण और न्यायिक कार्यों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।