बांग्लादेश सरकार शेख हसीना की जब्त संपत्तियों की करेगी नीलामी, मुआवजे में इस्तेमाल होगा धन

बांग्लादेश सरकार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की जब्त संपत्तियों की नीलामी और बिक्री से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को स्पष्ट करने की तैयारी कर रही है। सरकार की योजना ऐसी संपत्तियों से प्राप्त धन का इस्तेमाल जुलाई 2024 के आंदोलन और हिंसा से प्रभावित तथा मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए करने की है। हालांकि, शेख हसीना के पैतृक घर को सीधे बेचने का फैसला अभी स्पष्ट नहीं है।

Sep 8, 2026 - 19:13
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बांग्लादेश सरकार शेख हसीना की जब्त संपत्तियों की करेगी नीलामी, मुआवजे में इस्तेमाल होगा धन

UNITED NEWS OF ASIA. ढाका। बांग्लादेश सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की जब्त संपत्तियों की नीलामी और बिक्री की प्रक्रिया को लेकर कानूनी प्रावधान स्पष्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार की योजना जब्त संपत्तियों की बिक्री या नीलामी से प्राप्त धन का इस्तेमाल जुलाई 2024 के आंदोलन और उसके दौरान हुई हिंसा से प्रभावित लोगों तथा मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने के लिए करने की है। हालांकि, शेख हसीना के चर्चित पैतृक घर को सीधे नीलाम किए जाने की बात फिलहाल स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य पीड़ितों और शहीदों के परिवारों को मुआवजा उपलब्ध कराना है। इस संबंध में ट्रिब्यूनल के कानून और मौजूदा नियमों में संपत्ति जब्त करने, जुर्माना लगाने तथा पीड़ितों को मुआवजा देने से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं।

मुख्य सरकारी वकील मोहम्मद अमीनुल इस्लाम ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जब्त संपत्तियों को किस सरकारी प्रक्रिया के तहत बेचा या नीलाम किया जाएगा, इसे लेकर अभी नियमों में स्पष्टता की जरूरत है। सरकारी वकीलों के अनुसार, मौजूदा नियमों में आवश्यक बदलाव के बाद ही संपत्तियों की बिक्री या नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

जुलाई नरसंहार मामले में ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना और कई अन्य लोगों के खिलाफ मृत्युदंड और संपत्ति जब्ती से संबंधित आदेश दिया है। ऐसे में अब जब्त संपत्तियों के प्रबंधन और उनसे प्राप्त राशि के इस्तेमाल को लेकर कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

2024 के 12वें राष्ट्रीय संसद चुनाव के लिए दाखिल हलफनामे के अनुसार, शेख हसीना ने अपने नाम पर करीब 43.4 करोड़ टका की चल और अचल संपत्ति घोषित की थी। इसके अलावा धनमंडी स्थित मकान नंबर 32 को शेख हसीना के पैतृक घर के रूप में जाना जाता है। यह संपत्ति भी चर्चा के केंद्र में है, लेकिन इसे सीधे बेचने को लेकर अभी अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी व्यक्ति को मिली सजा के आधार पर उसके परिवार के वयस्क सदस्यों या किसी ट्रस्ट के नाम पर दर्ज संपत्ति को सीधे जब्त नहीं किया जा सकता। ऐसी संपत्ति पर कार्रवाई के लिए यह स्थापित करना आवश्यक हो सकता है कि वह अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई थी या वास्तविक मालिकाना हक किसी अन्य व्यक्ति का था।

सरकार की प्रस्तावित नीति का एक अहम पहलू जब्त संपत्तियों से मिलने वाली राशि का उपयोग मुआवजे के लिए करना है। यदि कानूनी प्रक्रिया के तहत संपत्तियों की जब्ती और बिक्री आगे बढ़ती है, तो इससे पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

फिलहाल सरकार संपत्तियों की बिक्री और नीलामी के लिए आवश्यक कानूनी व्यवस्था को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रही है। आने वाले समय में नियमों में बदलाव और संबंधित सरकारी प्रक्रिया के स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि किन संपत्तियों की नीलामी की जाएगी और उनसे प्राप्त धन का वितरण किस तरीके से किया जाएगा।