UN के नए नक्शे पर फिर विवाद, अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अलग क्षेत्र के रूप में दिखाने पर भारत की आपत्ति
संयुक्त राष्ट्र के नए विश्व मानचित्र को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। नक्शे में अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को भारत और चीन के दावों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों के रूप में प्रदर्शित किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसके आधिकारिक क्षेत्र को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना स्वीकार्य नहीं है।
UNITED NEWS OF ASIA. संयुक्त राष्ट्र (UN) की ओर से जारी दुनिया के नए नक्शे को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। नए मानचित्र में भारत के अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को अलग-अलग क्षेत्रों के तौर पर प्रदर्शित किए जाने की बात कही जा रही है। इस चित्रण को लेकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और आधिकारिक मानचित्र से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। खास बात यह है कि नए मानचित्र से संबंधित प्रस्ताव को भारत ने समर्थन दिया था, लेकिन भारत का कहना है कि उसका समर्थन केवल समान क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपण के सिद्धांत तक सीमित था।
नए नक्शे में अरुणाचल प्रदेश को असम और चीन की सीमा से लगे एक अलग क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश की नागालैंड से जुड़ी सीमा को भी अलग तरीके से प्रदर्शित किए जाने की बात सामने आई है। इसी तरह अक्साई चिन को भी एक स्वतंत्र क्षेत्र के तौर पर दिखाया गया है। नक्शे में इसका पश्चिमी हिस्सा भारत की ओर और पूर्वी हिस्सा चीन की ओर स्थित दिखाई देता है।
नक्शे में जम्मू-कश्मीर से जुड़ी भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा यानी LoC को भी दर्शाया गया है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से मानचित्र के फुटनोट में स्पष्ट किया गया है कि यह रेखा जम्मू-कश्मीर में भारत और पाकिस्तान द्वारा सहमत नियंत्रण रेखा को लगभग प्रदर्शित करती है। ऐसे में मानचित्र के विभिन्न हिस्सों को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस तेज हो गई है।
भारत पहले ही संयुक्त राष्ट्र के सामने अपने रुख को स्पष्ट कर चुका है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत द्वारा मानचित्र संबंधी प्रस्ताव का समर्थन समान क्षेत्रफल वाले मानचित्र प्रक्षेपण के सिद्धांत को लेकर था। साथ ही भारत ने स्पष्ट किया था कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों समेत देश के पूरे भूभाग को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुरूप ही प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
भारत का कहना रहा है कि उसके क्षेत्र का किसी भी प्रकार का गलत या भ्रामक चित्रण स्वीकार्य नहीं है। सरकार ने अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर अपना रुख स्पष्ट, सुसंगत और अपरिवर्तनीय बताया है।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के नए मानचित्र से जुड़ा प्रस्ताव पुराने मर्केटर वर्ल्ड मैप की जगह ऐसे मानचित्रों को बढ़ावा देने से संबंधित है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके वास्तविक क्षेत्रफल के अधिक करीब दिखाई देता है। मर्केटर प्रक्षेपण में ध्रुवीय क्षेत्रों के पास स्थित भूभाग अपेक्षाकृत बड़ा दिखाई देता है। नए तरीके में अफ्रीका अपेक्षाकृत बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे दिखाई दे सकते हैं।
हालांकि, मानचित्र प्रक्षेपण में बदलाव से किसी देश की वास्तविक सीमा या क्षेत्रफल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि मानचित्र पर भारत के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों को किस तरह प्रदर्शित किया गया है। अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन को लेकर भारत और चीन के बीच पहले से ही सीमा संबंधी मतभेद रहे हैं, ऐसे में संयुक्त राष्ट्र के मानचित्र में इन क्षेत्रों का अलग चित्रण कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।