GST Council Meeting: टैक्स सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी, ITC नियमों में राहत से व्यापारियों को फायदा
GST काउंसिल की आगामी बैठक में GST सिस्टम को आसान और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। इनमें इनपुट टैक्स क्रेडिट के नियमों में राहत, छोटे मामलों में नोटिस पर रोक, सप्लायर की गलती पर खरीदार का ITC सुरक्षित रखने और छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न प्रक्रिया आसान करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि, ये बदलाव प्रस्तावित हैं और अंतिम निर्णय काउंसिल की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा।
UNITED NEWS OF ASIA. देश के टैक्स सिस्टम में एक बार फिर बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। केंद्र सरकार GST व्यवस्था को और आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है और इसी क्रम में GST 2.0 से जुड़े कई प्रस्तावों पर चर्चा की जा सकती है। आगामी GST काउंसिल बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, इनपुट टैक्स क्रेडिट और टैक्स विवादों से जुड़े नियमों की समीक्षा होने की संभावना है। प्रस्तावों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए GST प्रक्रिया को सरल बनाना और लंबे समय से अटके टैक्स क्रेडिट को राहत देना है।
सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़ा है। GST व्यवस्था के शुरुआती वर्षों में लागू किए गए कई कड़े नियमों और पाबंदियों को आसान बनाने पर विचार किया जा सकता है। टैक्स सिस्टम अब डेटा और तकनीक पर आधारित हो चुका है, ऐसे में कागजी जांच की जगह ऑटोमेटेड और रिस्क आधारित व्यवस्था को बढ़ावा देने की तैयारी है। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो कारोबारियों और उद्योगों की अटकी हुई पूंजी को राहत मिल सकती है।
GST कानून की धारा 17(5) के तहत फिलहाल कई तरह के खर्चों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध नहीं होता। प्रस्तावित बदलावों में कुछ ऐसी श्रेणियों को फिर से ITC के दायरे में लाने पर विचार किया जा सकता है। इनमें कर्मचारियों के हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस, आउटडोर कैटरिंग, टेलीकॉम टावर, फैक्ट्रियों के बाहर बिछाई गई पाइपलाइन, मुफ्त सैंपल और एक्सपायर होकर नष्ट होने वाले सामान जैसे मामले शामिल बताए जा रहे हैं। 13 सीटों तक की गाड़ियों, उनके इंश्योरेंस, मेंटेनेंस और लीज पर लेने से जुड़े खर्चों पर भी ITC की संभावना पर विचार हो सकता है।
इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत फंसे टैक्स के रिफंड से भी कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यदि इस तरह के प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो उद्योगों की अटकी पूंजी वापस आ सकती है और इसका इस्तेमाल कारोबार के विस्तार तथा अन्य उत्पादक गतिविधियों में किया जा सकता है।
GST विवादों में सप्लायर की गलती से जुड़े मामलों को लेकर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। मौजूदा व्यवस्था में कई बार सप्लायर द्वारा टैक्स जमा नहीं करने की स्थिति में खरीदार का ITC प्रभावित हो जाता है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि खरीदार का लेन-देन वास्तविक और नियमों के अनुरूप पाया जाता है, तो केवल सप्लायर की गलती के कारण खरीदार का ITC नहीं छीना जाएगा। ऐसी स्थिति में टैक्स की वसूली संबंधित डिफॉल्ट करने वाले सप्लायर से किए जाने का प्रस्ताव है।
छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत की उम्मीद है। प्रस्तावित बदलावों में 10 हजार रुपये से कम के मामलों में कारण बताओ नोटिस जारी करने पर रोक लगाने की बात कही गई है। यह व्यवस्था लंबित मामलों पर भी लागू किए जाने का प्रस्ताव बताया जा रहा है। इससे छोटी-मोटी कर संबंधी गड़बड़ियों को लेकर कारोबारियों पर पड़ने वाला अनुपालन का बोझ कम हो सकता है।
आईटी और आईटीईएस कंपनियों के लिए भी कुछ राहत प्रस्तावित है। विदेशी ब्रांच ऑफिस को दी जाने वाली कुछ सेवाओं को एक्सपोर्ट का दर्जा देने पर विचार किया जा सकता है, जिससे संबंधित कंपनियों को ITC का लाभ मिल सके। वहीं 5 करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर वाले ऐसे कारोबारियों के लिए रिटर्न प्रक्रिया आसान करने का प्रस्ताव है, जो केवल अनरजिस्टर्ड ग्राहकों को सामान बेचते हैं। उन्हें साल में एक बार रिटर्न दाखिल करने और हर तिमाही टैक्स भुगतान की सुविधा मिल सकती है।
कुल मिलाकर प्रस्तावित बदलावों का फोकस GST व्यवस्था को सरल, तकनीक आधारित और कारोबारियों के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने पर है। हालांकि, इन सभी प्रस्तावों को अंतिम रूप GST काउंसिल की मंजूरी के बाद ही मिलेगा। इसलिए कारोबारियों को अंतिम अधिसूचना और आधिकारिक नियम जारी होने का इंतजार करना होगा।