महाराष्ट्र MPSC में बड़ा बदलाव, तुकाराम मुंढे बने सदस्य सचिव; अध्यक्ष विवेक भीमनवार छुट्टी पर
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) में कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं की जांच के लिए राज्य सरकार ने समिति गठित की है। पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली समिति में तुकाराम मुंढे को सदस्य सचिव बनाया गया है। वहीं, आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार जांच पूरी होने तक छुट्टी पर चले गए हैं। सरकार की ओर से मांगों पर सहमति मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने 10 दिन से जारी आंदोलन समाप्त कर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. महाराष्ट्र में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा प्रणाली को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन 10 दिन बाद समाप्त हो गया है। राज्य सरकार ने आयोग में कथित पेपर लीक और भर्ती संबंधी अनियमितताओं की जांच के लिए समिति गठित करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा की है। सरकार की ओर से अभ्यर्थियों की मांगों पर सहमति मिलने के बाद आंदोलन वापस लेने का ऐलान किया गया।
तुकाराम मुंढे को मिली अहम जिम्मेदारी
महाराष्ट्र सरकार ने MPSC में व्यापक सुधार और कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समिति में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को सदस्य सचिव नियुक्त किया है। समिति की अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले करेंगे। इसके अलावा भारतीय पुलिस सेवा की अधिकारी लक्ष्मी गौतम, भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पी. डी. नाईक को समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
इस समिति का गठन आयोग की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों और कथित अनियमितताओं की जांच के उद्देश्य से किया गया है। सरकार के इस फैसले को अभ्यर्थियों की मांगों पर कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे आयोग के अध्यक्ष
MPSC के अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने जांच पूरी होने तक छुट्टी पर जाने की घोषणा की है। आयोग में कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी थी। राज्य सरकार द्वारा जांच समिति गठित किए जाने और अध्यक्ष के छुट्टी पर जाने के बाद प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया।
हालांकि, समिति की जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह जांच के परिणामों पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरकार ने समिति के गठन के जरिए इन शिकायतों की जांच कराने की पहल की है।
कंप्यूटर आधारित परीक्षा के फैसले के खिलाफ शुरू हुआ था प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत छत्रपति संभाजीनगर में 30 जून को होने वाली MPSC परीक्षाओं को कंप्यूटर के माध्यम से आयोजित करने के फैसले के विरोध में हुई थी। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग थी कि परीक्षाएं ऑनलाइन या कंप्यूटर आधारित प्रणाली के बजाय ऑफलाइन तरीके से कराई जाएं।
परीक्षा प्रणाली को लेकर शुरू हुआ विरोध बाद में आयोग में कथित पेपर लीक और भर्ती अनियमितताओं की जांच की मांग से भी जुड़ गया। अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन किया और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त
पुणे में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को राज्य मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने समिति गठित किए जाने की जानकारी दी। इसके बाद सरकार की ओर से मांगों पर सहमति मिलने के आधार पर अभ्यर्थियों ने रविवार देर रात आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।
अब समिति की जांच और सरकार की आगे की कार्रवाई पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी। जांच के निष्कर्षों से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि आयोग में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है।